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श्राइन बोर्ड का बेवजह विरोध स्वार्थी नेताओं की जुगलबंदी

गोवर्धन में हर साल आते हैं दो करोड़ श्रद्धालु, सेवाओं के नाम पर होती है खुली लूट

-मंदिरों, परिक्रमा मार्ग में होती है अभद्रता
-खान-पान की दुकानों पर दिया जाता है घटिया खाना

मथुरा। श्राइन बोर्ड का विरोध बेवजह है। चंद सेवायत इसे जनता का विरोध दिखाने की कोशिश कर रहे है जबकि हकीकत ये है कि ये ही लोग जब माता वैष्णों देवी के दर्शन करने जाते है तो श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं की खुले दिल से तारीफ करते है। सेवायतों के बेजा विरोध का जबाव देने के लिए अब आम जन, स्वयं सेवी संस्थाएं, समाजसेवी आगे आ रहे है।

माता वैष्णों देवी में हर साल करीब एक करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है। वहां 1986 में श्राइन बोर्ड का गठन किया। मकसद साफ था कि माता के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सहूलियत प्रदान की जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गोवर्धन में हर साल करीब दो करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन होता है। जाहिर सी बात है यहां बहुत पहले ही श्राइन बोर्ड का गठन कर व्यवस्थाओं को बेहतर किए जाने की कोशिश की जानी चाहिए थी। बहरहाल राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने हमारी प्राचीन संस्कृति की पहचान गिरिराज पर्वत केे संरक्षण के लिए बोर्ड के गठन का फरमान सुनाया है। योगी सरकार ने इस तरफ एक सकारात्मक पहल करते हुए गठन की पत्रावली पर जमी धूल को साफ करना शुरु किया है। इस पहल के बाद बस वो चंद लोग परेशान है जो सेवा के नाम पर श्रद्धालुओं को लूटते है। इस बेवजह विरोध को वो राजनेता भी हवा दे रहे है जिन्हें वहां वोटों की संभावना नजर आ रही है।

मंदिरों के अंदर श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता, परिक्रमा मार्ग में खाने-पीने के खराब सामान की बिक्री, वाहन चालकों द्वारा श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाकर अधिक किराए की वसूली, पूजा कार्य में सिथेटिक दूध की बिक्री जैसी अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं को ही नहीं आम जन के मन कचोटती है। ऐसे में बोर्ड का गठन न केवल सरकार की बेहतरीन सोच है बल्कि यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालु, स्थानीय लोगों के लिए भी एक अच्छी खबर है।



श्राइन बोर्ड के बाद ऐसे बनेगी व्यवस्था...
*गोवर्धन परिक्रमा मार्ग, मंदिरों की व्यवस्थाओं के लिए तैनात होंगे अफसर।
*गिरिराज पर्वत पर चढऩे वाले दूध को रिसाइकलिंग कर किया जाएगा उपयोग।
*कस्बे में जल की निकासी, सीवर के लिए बनाया जाएगा प्लान।
*गोवर्धन पर्वत को संरक्षित करते हुए अतिक्रमणों से मुक्त किया जाएगा।
*श्रद्धालुओं के लिए बोर्ड रेस्टोरेंट, स्टॉल संचालित करेगा। यहां रेट भी निर्धारित होंगे।
*बोर्ड स्थानीय समस्याओं जैसे ट्रैफिक जाम, गंदगी आदि समस्याओं का निस्तारण करेगा।

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