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दत्तोपंत ठेंगड़ी का सान्निध्य गंगा स्नान करने जैसा था

दत्तोपंत ठेंगड़ी का सान्निध्य गंगा स्नान करने जैसा था

नई दिल्ली। भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी के भाषणों पर आधारित पुस्तक ‘संकेत रेखा’ का लोकार्पण करते हुए नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का सान्निध्य गंगा स्नान करने जैसा होता था। उनके इसी दिव्य प्रभाव ने मजदूरों को संघर्ष के रास्ते से हटाकर सामंजस्य का मार्ग दिखाया।

विश्व पुस्तक मेले में गुरुवार को इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र एवं नेशनल बुक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में ‘संकेत रेखा’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। स्व. दत्ताेपंत ठेंगड़ी के भाषणों के संग्रह पर आधारित तथा स्व. भानुप्रताप शुक्ल द्वारा संकलित इस पुस्तक का पुनः प्रकाशन श्री भारती प्रकाशन, नागपुर ने किया है।

बलदेव भाई शर्मा ने इस अवसर पर बताया कि जीवन में कभी-कभी ऐसे क्षण रहते हैं, जिन क्षणों में उपस्थित रहकर हम बिना गंगा स्नान के पवित्र हो जाते हैं। दत्तोपंत ठेंगड़ी का सान्निध्य भी ऐसे ही क्षण थे, जिसमें हजारों ऊर्जावान कार्यकर्ता तैयार हुए।

उन्होंने स्व. ठेंगड़ी स्मरण दिलाते हुए कहा कि पहले भारत की चिंता करें, फिर अपनी। उनके कारण मजदूर संगठनों की सोच में परिवर्तन आया। मजदूरों को संघर्ष के रास्ते से हटाकर सामंजस्य के मार्ग पर लाने का कार्य दत्तोपंत ठेंगड़ी ने किया। शुद्ध सात्विक प्रेम को कार्य का आधार बनाकर राष्ट्र निर्माण के लिए अलग-अलग संगठनों की स्थापना स्व. ठेंगड़ी ने की। पुस्तक विमोचन के मौके पर दत्तोपंत ठेगड़ी के लम्बे समय तक सहयोगी रहे भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष रामदास पांडे, पांचजन्य से संपादक हितेश शंकर व श्री भारती प्रकाशन के प्रमुख गंगाधर ने पुस्तक के विषय तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी के जीवन के विविध आयामों पर वक्तव्य दिया।

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