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लाखेरी में किसानों के आॅर्गेनिक हब के सपने को पूरा करने में मदद की : एसीसी

लाखेरी में किसानों के आॅर्गेनिक हब के सपने को पूरा करने में मदद की : एसीसी

कोटा। एसीसी लाखेरी सीमेंट वर्कर्स के आस-पास के गांवों के किसानों ने एक सपना देखा था। वे धीरे-धीरे एसीसी द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे तकनीकी ज्ञान की मदद से कार्बनिक खेती को अपना रहे हैं।

बता दें कि एसीसी द्वारा इसकी पेशकश एलईआइएसए (लो एक्सटर्नल इनपुट फाॅर सस्टैनेबेल एग्रीकल्चर) पहल के माध्यम से की जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि एक दिन इस क्षेत्र को राजस्थान के आॅर्गेनिक फार्मिंग हब (कार्बनिक कृषि केन्द्र) के रूप में जाना जायेगा। हजारों मील का यह सफर महज एक कदम से शुरू हुआ था और वह कदम उठाया गया था लाखेरी में। कार्बनिक खेती पहल 550 हेक्टेयर के कृषि क्षेत्र में फैली हुई है और लाखेरी प्लांट के आस-पास के 10 गांवों के 350 किसान परिवार इसमें संलग्न हैं। साथ ही प्रत्येक गांव में किसानों को फाॅर्मर क्लब्स में संवेदनशीन और संगठित बनाया गया और उसे कृषि, बागबानी विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, नाबार्ड और कृषि विश्वविद्यालय से जोड़ा गया है, ताकि विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के तहत उन्हें लाभ प्राप्त हो सके।

किसान क्लब के सदस्यों के सबसेट के साथ कृषि के बेहतर तौर-तरीकों को प्रोत्साहित करना शुरू किया गया। इसमें प्रत्येक गांव के 5 से 10 प्रगतिशील किसानों को उनके खेतों में सर्वश्रेष्ठ तरीकों को प्रदर्शित करने के लिये चिन्हित किया गया। डिमाॅन्स्ट्रेशन प्लाॅट्स स्थापित किये गये और कृषि विज्ञान केन्द्र बूंदी एवं अन्य साझीदार एजेंसियों द्वारा किसानों को खेत तैयार करने, मृदा परीक्षण, बीज उपचार, पौधों के प्रकारों का चुनाव, फसल का उत्पादन करने के बेहतर तरीकों और खाद की सही खुराक इत्यादि के बारे में सहयोग और मार्गदर्शन दिया गया।

कार्बनिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिये किसानों को वर्मि-काॅम्पोस्ट यूनिट्स की स्थापना करने में प्रशिक्षण एवं सहयोग प्रदान किया गया। साथ ही उन्हें कार्बनिक खाद एवं कार्बनिक कीटनाशकों को तैयार करने में भी उनकी मदद की गई और उन्हें प्रशिक्षित किया गया। डिमाॅन्स्ट्रेशन प्लाॅट्स में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जगह पूरी तरह से बायो फर्टीलाइजर्स एवं बायो पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल किया गया। किसानों के खेतों में 155 वर्मि-काॅम्पोस्ट यूनिट्स स्थापित किये गये, जहां पर अवशिष्ट पदार्थों और पशुओं के गोबर का इस्तेमाल कर कम्पोस्ट बनाये गये। किसानों को आर्गेनिक कल्चर एवं फंगीसाइड्स का इस्तेमाल शुरू करने के लिये भी प्रोत्साहित किया गया।

इस क्षेत्र में एलईआइएसए की सफलता के बारे में बताते हुये श्री नीरज अखौरी, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, एसीसी लिमिटेड ने कहा, ‘‘लाखेरी कस्बे में कार्बनिक उत्पाद को काफी पसंद किया जा रहा है और यहां का अधिकतर उत्पाद बिक जाता है। ग्राहक कार्बनिक उत्पादों की गुणवत्ता को देखते हुये अधिक कीमत अदा करने से भी नहीं कतराते है। इसलिये किसानों द्वारा कार्बनिक खेती को तेजी से अपनाया जा रहा है। जिस तरह से क्षेत्र में एलईआइएसए को अपनाया जा रहा है, उसे देखते हुये उम्मीद है कि जल्द ही समूचा क्षेत्र पूरी तरह से कार्बनिक हो जायेगा।‘‘

लाखेरी के एक किसान मोरपाल गुजर ने एलईआइएसए के सकारात्मक प्रभाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘एसीसी ने सृजन इंडिया के सहयोग से लाखेरी में किसानों की जिंदगी बदल कर रख दी है। एसीसी टीम ने विशेषज्ञों को एकजुट किया है, ताकि वे हमें कार्बनिक खेती के विभिन्न तरीकों के बारे में बता पायें और उनके कार्यान्वयन को प्रदर्शित कर सकें। इन प्रयासों के कारण हम कृषि के स्थायित्वपूर्ण तरीकों को विकसित कर पाये हैं और अब हमने एक कार्बनिक खेती केन्द्र स्थापित किया है, जिसके द्वारा विभिन्न फसलें उगाई जा सकती हैं। कार्बनिक खेती से हमें कीटनाशकों एवं रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च घटाने में भी मदद मिली है। इस तरह हर साल प्रति किसान 7000-8000 रूपये तक की बचत हो रही है।‘‘

इस परियोजना क्षेत्र को एक कार्बनिक केन्द्र बनाने की दिशा में अगल कदम उठाने के लिये किसानों को सर्टिफाएड आॅर्गेनिक उत्पाद बनाने के लिये पंजीकृत किया जायेगा। इसके लिये विभिन्न फार्मर प्रोर्ड्यूसर्स संगठन स्थापित किये जायेंगे। राजस्थान स्टेट सीड एवं आर्गेनिक प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी ने इस प्रकार के सर्टिफिकेशन्स के लिये नियम बनाये हैं। कार्बनिक खेती के अधिक व्यापक बनने के साथ आर्गेनिक फार्मिंग के अंतर्गत अधिक क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों को आॅर्गेनिक ग्रोअर ग्रुप के रूप में प्रमाणन प्राप्त करने की सुविधा दी जायेगी।

एसीसी लिमिटेड, लफार्ज होल्सिम ग्रुप का अंग है। यह भारत में सीमेंट और रेडी मिक्स कंक्रीट की अग्रणी निर्माताओं में से एक है। 7800 कर्मचारियों, 17 उत्पादन इकाईयों, 50 कंक्रीट प्लांट्स, 50,000 से अधिक रिटेट आउटलेट्स के एक देशव्यापी नेटवर्क और मुंबई में एक अनुसंधान व विकास केन्द्र, एसीसी के उत्पादों व सेवाओं की गुणवत्ता तथा साथ ही तकनीकी विकास के प्रति इसकी अपनी प्रतिबद्धता इसे विनिर्माण सामग्रियों में एक पसंदीदा ब्रांड बनाती है। एसीसी की स्थापना 1936 में की गई थी। एसीसी की गिनती देश की ‘‘सर्वाधिक स्थायित्वपूर्ण कंपनियों‘‘ में की जाती है। इसे पर्यावरणीय प्रबंधन एवं काॅर्पोरेट नागरिकता में अपने सर्वश्रेष्ठ तरीकों के लिये सम्मानित किया गया है।


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