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लहार एसडीओपी ने तीन पत्रकारों को थमाए नोटिस, गाली-गलौच का वीडियो हुआ वायरल

लहार एसडीओपी ने तीन पत्रकारों को थमाए नोटिस, गाली-गलौच का वीडियो हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर पुलिस और पत्रकारों का धमाल


भिण्ड, ब्यूरो/अनिल शर्मा। भिण्ड जिले में भी पिछले एक माह से सोशल मीडिया पर पुलिस-पत्रकार जमकर छाए हुए हैं और कई बड़े-बड़े धमाल भी कर रहे हैं। भिण्ड की राजनीति की हलचल पूरी तरह अवैध खनिज उत्खनन व परिवहन पर केन्द्रित हो गई है। चर्चाओं के दौर में पुलिस व पत्रकारों के घमासान का मजा राजनीति के लोग भी जमकर ले रहे हैं। अभी तक देहात थाना क्षेत्र का सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आॅडियो मामले का पूरी तरह पटाक्षेप भी नहीं हुआ था कि लहार एसडीओपी व पत्रकारों के बीच सोशल मीडिया पर घमासान मच गया है। अब देखना यह है कि थाना निरीक्षक के बाद एसडीओपी पर गाज गिरती ह या नहीं।

यदि देहात थाना निरीक्षक व एक पत्रकार के वायरल आॅडियो व लहार एसडीओपी व पत्रकारों के बीच एक गु्रप पर छिड़ी बहस की समीक्षा करें तो दूध का धुला कोई नजर नहीं आता है, इन दोनों प्रकरणों से आमजन यही अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं न कहीं पुलिस व पत्रकारों की सांठ-गांठ तो है, जो उद्देश्यों की पूर्ति विफल होने से उजागर हुई है, कहते हैं कि पुलिस-पत्रकार का चोली दामन का साथ होता है। यदि खुल जाए तो बड़े-बड़े रहस्य उजागर हो जाते हैं। शायद यही बात चरितार्थ हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल पुलिस अधिकारी व पत्रकार आॅडियो की यदि बारीकी से समीक्षा करें तो उससे यह तो स्पष्ट हुआ है कि पुलिस की भूमिका अपने कर्तव्यों के प्रति वफादार तो नहीं हैं। तभी तो पत्रकार के दबाव में वह अपने कर्तव्यों से विमुख होकर ऐसे कृत्य करने को मजबूर हैं, जो उन्हें नहीं करना चाहिए।

यदि मीडिया का कोई व्यक्ति अपने प्रभाव को दिखाकर कोई गलत कार्य कराना चाहता है, तो पुलिस गलत काम करने को क्यों मजबूर है? निश्चित रूप से पुलिस विभाग अपने काले कारनामों को उजागर न होने देने के लिए मीडिया को मैनेज करता हैं। जिसकी जानकारी सिपाही से लेकर जिले के सबसे बड़े पुलिस के आला अधिकारी को भी है। हैरत यह है कि हत्या जैसे संगीन मामले को दुर्घटना में तब्दील करवाने की भी चर्चा सुनने को मिली, जो गंभीर है। यदि ऐसा है तो यह अक्षम्य अपराध है। इसकी जांच भी होना चाहिए और कार्रवाई भी। पुलिस अधिकारियों ने अपने दामन को दागदार होने से बचाने के लिए आनन-फानन में एक थाना निरीक्षक को निलंबित करने के साथ मामले का पटाक्षेप कर दिया। एक बहुत बड़े मीडिया संस्थान ने भी पत्रकारों को इधर से उधर कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। निश्चित रूप से पुलिस व मीडिया संस्थान ने सजा मुकम्मल कर मामले की पुष्टि तो कर दी है। लेकिन क्या यह पर्याप्त था, यह दोनों के लिए विचारणीय प्रश्न है कि आखिर लहार एसडीओपी की ऐसी कौन सी कमजोरी थी जो छोटे भाइयों की खातिर बदनामी झेल रहे थे। वे छोटे भाई कौन हैं?

वर्तमान में लहार एसडीओपी का एक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है। जिससे वे बौखलाकर एक गंवार की भाषा में गंदी-गंदी गालियां अपने मुह से निकाल रहे हैं। यही नहीं सोशल मीडिया के एक गु्रप पर पुलिस अधिकारी व पत्रकारों के बीच तीखी बहस भी लंबे समय तक चली, उन्होंने मीडिया को फर्जी और न जाने क्या-क्या कहा, सोशल मीडिया के सहारे दलाली करने वालों को भी आड़े हाथ लिया और धमकी भरे शब्द भी लिखे। मीडिया कर्मियों ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी और अंत में पुलिस के तमाम अधिकारियों ने सोशल मीडिया के ग्रुपों से लेफ्ट होना शुरू कर दिया। तो कुछ समझदार ग्रुप एडमिनों ने स्वयं ही पुलिस अधिकारियों को रिमूव कर दिया। यहां भी लहार एसडीओपी ने चैट में कहा है कि अपने छोटे भाईयों की खातिर बदनामी झेल रहा था, अर्थात छोटे भाई से तात्पर्य कुछ लोगों के अवैध रूप से रेत के ट्रक चल रहे थे, जिनको नहीं पकड़ रहा था। यहां यह विचारणीय है कि आखिरकार लहार एसडीओपी की ऐसी कौन सी कमजोरी थी जो छोटे भाईयों की खातिर बदनामी झेल रहे थे। यदि मित्रता में कर रहे थे, तो भी गलत है। कहीं न कहीं यहां भी पुलिस की सांठ-गांठ से कारोबार चलने की उनकी ही बातों से पुष्टि तो होती है। इन दिनों सोशल मीडिया काफी प्रभावशाली है, आए दिन सोशल मीडिया पर कई मुद्दे सुर्खियों में आते रहते हैं, जिन पर शासन, प्रशासन को कार्रवाई करने तक मजबूर होना पड़ा है। वर्तमान में सबसे सशक्त मीडिया इसको ही माना जा रहा है। साथ ही जब तक पुलिस तब तक सारे ग्रुप अच्छे थे और जैसे ही छीछालेदर हुई तो सब ग्रुप छोड़ गए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भिण्ड जिले में रेत के उत्खनन को सोना उगलना माना जा रहा है और कथित पत्रकार तथा पुलिस के अधिकारी बहती गंगा में हाथ धोने को इतने उतावले हैं कि इज्जत भले ही चली जाए पर पैसा आ जाए। बेशर्मी की पराकाष्ठा लांघ चुके और इस खेल की पोल खुली तो हमाम में सब नंगे नजर आए।


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