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जैन समाज का 'पर्वराज पर्युषण' महापर्व होगा अगले सप्ताह से शुरू

जैन समाज का पर्वराज पर्युषण महापर्व होगा अगले सप्ताह से शुरू


स्वदेश वेब डेस्क। जैन धर्म के दिगंबर अनुयायियों का पर्वराज पर्युषण महापर्व 26 अगस्त से होने जा रहा है। जिसमें अनुयायी दस लक्षणों को अपनाकर सांसारिक सुखों से दूर रहने का संकल्प लेंगे। साथ ही पर्व की समाप्ति पर क्षमावाणी का आयोजन कर वे एक दूसरे से गले मिलेंगे और वर्ष भर जो भी गलतियां हुई होंगी, उसके लिए क्षमा मांगेंगे।

सिविल लाइंस के दीनानाथ जैन ने बताया कि पर्वराज पर्युषण 26 अगस्त से शुरू होगा। इसी के साथ शुरू हो जाएगी जीवन परिवर्तन की यात्रा। नित्य जैन धर्म (दिगंबर जैन) के मंदिरों में सत्संग, अभिषेक और पूजन होगा। श्रद्धालु सत्य, धर्म, ब्रह्माचर्य को अपनाने का संकल्प लेंगे। बुराइयों से दूर रहने, अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह से बचने की सीख उन्हें जैन संत देंगे। इस अवधि में मंदिर ऐसे शिक्षालय होंगे जहां दस दिन तक सुखी जीवन के सूत्र की जानकारी तो लोगों को होगी ही इसके बाद फिर पूरे वर्ष परीक्षा चलती रहेगी।

बताते चलें कि महापर्व को ही पर्वराज पर्युषण कहा जाता है। जो दस लक्षण हैं वही दस धर्म भी हैं। इसलिए इस धर्म को अपनाकर ही जैन धर्म के अनुयायी सांसारिक दुखों से बचेंगे। पर्वराज पर्युषण पर्व पर प्रतिदिन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी, शांतिनाथ भगवान, एकनाथ भगवान आदि 24 तीर्थकरों का पूजन करेंगे। पर्व की समाप्ति पर क्षमावाणी का आयोजन कर वे एक दूसरे से गले मिलेंगे और वर्ष भर जो भी गलतियां हुई होंगी, उसके लिए क्षमा मांगेंगे। एकनाथ जैन ने बताया कि उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन और उत्तम ब्रह्माचर्य ही जैन धर्म के दस लक्षण हैं। बताते चलें कि जैन धर्म दो भागों में बटा है एक दिगंबर और दूसरा श्वेतांबर। दिगंबर अनुयायी अभी भी उसी तरह जैन धर्म के कठिन नियमों का पालन करते हैं।

पांच सितम्बर को अनंत चतुर्दशी के दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष पूजन होगा। जनरलगंज स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, आनंदपुरी स्थित जैन मंदिर और अन्य मंदिरों में विशेष उत्सव का आयोजन होगा।







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