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करोड़ों का पत्थर चोरी करता रहा माफिया

करोड़ों का पत्थर चोरी करता रहा माफिया

-फर्जी तरीके से रॉयल्टी कट्टे जारी करते रहे रिश्वतखोर अधिकारी
-जिन खदानों से एक पत्थर नहीं निकला, दिखा दिया हजारों टन का उत्खनन

ग्वालियर। बिलौआ में शासकीय पट्टों से अवैध उत्खनन किए जाने का आरोप पट्टाधारक खनन कारोबारियों के सिर मढ़कर खनिज विभाग के रिश्वतखोर अधिकारियों को बचाया जा रहा है। अरबों की वसूली के नोटिस में उलझे खनिज कारोबारी जहां सरकार को गालियां दे रहे हैं। वहीं मोटी रिश्वत खाकर खनिज लुटवाते रहे अधिकारी मुंह में गुड़ दबाए बैठे हैं।

ग्वालियर जिले में अकेला बिलौआ एक मात्र ऐसा खनन क्षेत्र नहीं है, जहां शासकीय भूमि से अवैध उत्खनन किया गया हो। प्रत्येक खनन क्षेत्र में जहां भी खदानों के पट्टे आवंटित किए गए पट्टा धारकों अथवा खनिज माफिया ने अधिकारियों से सांठगांठ कर सरकारी जमीन में धमाके किए और करोड़ों का खनिज चोरी से निकाल डाला। सरकारी खजाने के हिस्से की इस राजस्व चोरी के लिए खनिज कारोबारी अथवा खनन माफिया जितना दोषी है उससे कहीं अधिक जिला खनिज अधिकारी मनीष पालेवार और ग्वालियर में अवैध खनन पर नजर रखने के लिए पदस्थ किए गए दोनों खनिज निरीक्षक रमेश रावत और सुमित गुप्ता दोषी हैं। जिले में आज भी दर्जनों आवंटित ऐसी खदानें मौजूद हैं, जिन पर से एक पत्थर भी नहीं निकाला गया है। इसके बावजूद जिला खनिज अधिकारी मनीष पालेवार ने इन खदानों से हजारों टन खनिज का उत्खनन दिखाकर रॉयल्टी के कट्टे जारी किए। सवाल उठता है कि खनिज कारोबारियों ने जब इन पट्टों से खनिज निकाला ही नहीं तो इन रॉयल्टी कट्टों का उपयोग आखिर किस स्थान से माल निकालकर उसे बेचने में किया। जिस समय शासकीय पट्टों पर अवैध उत्खनन हो रहा था उस समय खनिज अधिकारी और खनिज निरीक्षकों ने रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की। जिलाधीश ने बिना किसी प्रमाण के अरबों रुपये के खनिज चोरी के लिए पट्टाधारक उन खनिज कारोबारियों को दोषी कैसे घोषित किया, जिनकी खदानों के आसपास की सरकारी जमीन पर अवैध उत्खनन कर अरबों का पत्थर चोरी हो गया। यह बात न तो खनिज कारोबारियों के समझ में आ रही है और न ही खनिज विभाग के जानकार इस गणित को समझ पा रहे हैं।

खनिज संचालक देंगे क्लीन चिट!

खनिज कारोबारियों पर अरबों रुपये के अर्थदंड को लेकर खनिज कारोबारियों में चर्चाएं जोरों पर हैं। चर्चाओं पर विश्वास करें तो जिलाधीश अर्थदंड के अपने इस आदेश को यथावत रखेंगे। जिलाधीश के इस आदेश के विरुद्ध खनिज कारोबारी संचालक खनिज के यहां अपील करेंगे। अपील के दौरान सक्रिय दलाल सौदा तय करेंगे और मामला ले देकर सुलटना तय है। ऐसा नहीं कि खनिज कारोबारियों पर अर्थदंड के प्रकरण पहली बार सामने आए हों, लेकिन इस बार अर्थदंड बहुत ज्यादा लगाया गया है। खनिज कारोबारी चर्चा कर रहे हैं कि पहले कम रिश्वत से काम चल जाता था, इस बार रिश्वतखोरों में बंदरबांट के लिए मोटी रकम पहुंचानी पड़ेगी।

खनिज निरीक्षकों को फटकार, सुनवाई 28 तक टली

बिलौआ के जिन 24 खनिज कारोबारियों पर जिलाधीश ने अरबों रुपये का अर्थदण्ड लगाया है। वह सोमवार को अपने अभिभाषकों के माध्यम से जिलाधीश न्यायालय में पहुंचे। खनिज कारोबारी मुनेन्द्र मंगल के पहले ही प्रकरण की सुनवाई के लिए उपस्थित हुए उनके अभिभाषक संजय शर्मा से जिलाधीश ने खनिज कारोबारी को दिए गए नोटिस का लिखित जवाब मांगा तो अभिभाषक ने बताया कि वह 11 खनिज कारोबारियों के प्रकरण की सुनवाई के लिए उपस्थित हुए हैं। एक भी प्रकरण में उन्हें आरोप पत्र की कॉपी नहीं दी गई है। इस पर जिलाधीश ने खनिज विभाग की ओर से उपस्थित खनिज निरीक्षक राजेश रावत और सुमित गुप्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि तुम्हे इतना ज्ञान नहीं हैं कि न्यायालय में आने वाले हर केश की कॉपी आरोपी पक्ष को दी जानी चाहिए। उन्होंने एक घंटे में केश की कॉपी आरोपी खनिज कारोबारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। हालांकि दूसरे प्रकरणों में अभिभाषकों ने मौखिक रूप से पक्ष रखने की कोशिश की तो जिलाधीश ने कहा कि आपकी जो भी आपत्तियां हैं नोटिस के उत्तर में लिखकर दें। अगली सुनवाई के लिए पहले जिलाधीश ने 22 अगस्त का समय दिया। लेकिन अभिभाषकों द्वारा अधिक समय मांगे जाने के बाद अगली सुनवाई को 28 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया। जिलाधीश ने कहा कि इससे ज्यादा समय नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें ईसी (एनवायरमेंट क्लीयरेंस) के प्रकरण भी निपटाने हैं। अधिक समय दिया जो ईसी की बैठक आगे बढ़ानी पड़ेगी।

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