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अब चार जुलाई से नहीं होंगे मांगलिक कार्य

अब चार जुलाई से नहीं होंगे मांगलिक कार्य


अब चार जुलाई के बाद लगभग साढ़े 5 माह मांगलिक कार्य पर रोक लग जाएगी। गुरू अस्त होने के साथ ही इस बार देव उठनी ग्यारस पर भी विवाह मुहूर्त नहीं है। इसके बाद नवम्बर में तीन, दिसम्बर में चार, जनवरी में एक भी नहीं, फरवरी में एक और मार्च में दो विवाह मुहूर्त ही हैं। 12 अक्टूबर से 7 नवम्बर तक गुरू अस्त रहेंगे। इस बार 23 नवंबर को पहला मुहूर्त होगा। इसके पहले शहनाई की गूंज बिल्कुल बंद रहेगी। चार जुलाई से 23 नवम्बर तक कुल 142 दिन विवाह मुहूर्त नहीं है।

अब केवल विवाह के मुहूर्त के मात्र कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। 3 जुलाई तक विवाह मुहूर्त के बाद 4 जुलाई से गुरू अस्त होने के बाद चार माह 22 दिन के लिए शहनाई नहीं गूंज पाएंगी। इस बीच में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है। देवस्थ स्थान एकादशी को जागेंगे, लेकिन उस दिन भी विवाह मुहूर्त नहीं है। हालांकि देव उठनी ग्यारस को अभूज मुहूर्त माना जाता है, ऐसे में कुछ लोग बिना पंचाग मिलाए भी विवाह कर सकते हैं।

आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानि देवसोनी एकादशी पर इस दिन देव चार माह के लिए शयन कक्ष में चले जाएंगे, जिससे विवाह मुहूर्त एवं सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। इसकी वजह से 4 जुलाई से 22 नवम्बर तक शहनाई की गूंज नहीं सुनाई देगी। हिन्दू मान्यता के अनुसार ऐसे में भगवान विष्णु के निंद्रारत होने की वजह से उनकी नींद में खलल नहीं डाला जा सकता है, इसीलिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।

* 8 मार्च तक 10 विवाह मुहूर्त
* नवम्बर में 23, 28, 29
* दिसम्बर में 3, 4, 10, 11
* जनवरी कोई विवाह मुहूर्त नहीं
* फरवरी में चार
* मार्च में तीन और आठ

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