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शुरुआती अभ्यासार्थियों के लिये 11 योग सुझाव

शुरुआती अभ्यासार्थियों के लिये 11 योग सुझाव

कितनी बार हम एक व्यक्ति को कुछ चित्रमय पृष्ठभूमि के सम्मुख शीर्षासन करते हुए कल्पित करते है और कहते हैं कि 'योग मेरे लिए नहीं है'? आप इन 11 अद्वितीय शुरुआती योग युक्तियों को जानने के बाद आप पुनः विचार करने पर विवश हो जायेगें। यह आपके योग अभ्यास को शुरू करने और योग द्वारा पृदक्त लाभ को उठाने का एक आसान तरीका है। उन्हें पढ़ें और अपने आप को एक खूबसूरत पृष्ठभूमि के सम्मुख योग करते हुए पायें।

1. शुरुआती अभ्यासार्थियों के लिए योग

शुरुआती अभ्यासी के रूप में, अक्सर योग को हम कुछ कठिन, अंगों को मोड़ने वाले आसन के सदृश्य समझते हैं। और कभी-कभी क्या आप चिंतित नहीं होते हैं कि: "मैं अपने पैर की उंगलियों को भी नहीं छू सकता, मैं योग कैसे कर सकता हूं?" योग आपके पैर की उंगलियों को छूने या अपने पूर्वोत्तर में 98 डिग्री तक खींचना नहीं है यह आपको आपके साथ जोड़ने की एक सरल प्रक्रिया है - अपनी सांस, शरीर और मन का उपयोग करके और यह आसान और प्रयासविहीन है। तो, अगर आप सुश्री लचकदार या श्री लचीले नहीं हैं, या 40 साल की उम्र में योग में प्रवेश कर रहे हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है, या आपके कोई छिपे हुए लव हैंडल्स( कमर के आस-पास की चर्बी) है जो आपको तनाव दे रहे हैं - बस योग अभ्यास से पहले सभी मिथकों को हटा दें ! केवल एक ही है जो आप को देख रहे हैं ,वह आप हैं- तो बस विश्राम करो। इस यात्रा से आपको बहुत आनंद और विश्राम मिल जाएगा!

2. योग ,जीवन के लिए एक नया आयाम

एक योग्य योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग सीखना शुरू करना सबसे अच्छा है जो आपको प्रत्येक तकनीक को करने के सही तरीके से अवगत कराते हुए आगे बढ़ा सके। इससे आपको योग आसनों (मुद्राओं) को ठीक से सीखने और संभावित चोटों से बचने में मदद मिलेगी। योग में सिखाये जाने वाले कुछ दर्शन या तकनीक नई हो सकती हैं लेकिन यह एक अच्छा विचार है कि दिमाग को खुला रखें, क्योंकि इससे आपकी दृष्टि को व्यापक बनाने में मदद मिलेगी और आपके योग के अनुभव में वृद्धि होगी।

3. योग सीखने के लिये विशेषज्ञों की मदद लें

यदि आपके पास एक चिकित्सीय बीमारी है, तो अपने योग प्रशिक्षण के प्रारंभ से पहले अपने श्री श्री योग प्रशिक्षक को सूचित करें। इससे शिक्षक को आपके योग आसन अभ्यास को आपके अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी और किसी आप किसी भी तरह की जटिलता या चोट से बचें रहेंगे।

4. आरामदायक पोशाक पहने

योग कक्षा में जाने के लिये या घर पर योग का अभ्यास करते समय आरामदायक कपड़े पहनें। इसके अलावा, बेल्ट या अत्यधिक गहने पहनने से बचें, क्योंकि यह आपके योग अभ्यास की राह में आड़े आ सकता है।

5. एक नियमित योगी बनें

यद्यपि सुबह सवेरे योग आसन का अभ्यास करना सबसे अच्छा है, लेकिन जब तक आप अपने अभ्यास के साथ नियमित नहीं होते, दिन का कोई भी समय ठीक होता है। यदि सुबह का समय आपके कार्यक्रम के अनुकूल नहीं है, तो इसे योग का अभ्यास पूरी तरह से छोड़ने का एक बहाना न बनाऐं!

6. हलके रहें

खाली पेट या अपने पिछले भोजन के कम से कम 2-3 घंटे बाद योग अभ्यास करने की सलाह दी जाती है । साथ ही, यह सलाह दी जाती है कि दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पियें, क्योंकि इससे आपको अपने योग अभ्यास के दौरान शरीर के बाहर निकलने वाले विषाक्त पदार्थों को बाहर फेंकनें में मदद मिलेगी।

7. योगा मैट पर जाने से पहले वार्म-अप

सूक्ष्म व्यायाम या हलके वार्म-अप अभ्यास शरीर को ढीला करने में मदद करते हैं और इसके आगे आने वाले योग आसनों के लिए तैयार करते हैं। यहाँ कुछ वार्म-अप अभ्यास हैं:

- सिर, भौंओं, नाक और गाल की मालिश: जब भी हम कोई गलती करते हैं, हम सहज रूप से सिर पर एक हाथ रख देते हैं। यह एक संकेत है कि मस्तिष्क में रक्त परिसंचरण कम है और मालिश की आवश्यकता है!

- किसी भी अकड़न को दूर करने के लिए अपनी गर्दन घुमाएँ, दोनों दक्षिणावर्त और वामावर्त।
- अपने कंधों को पंप करें और हाथों को झटकें ,आलस को दूर कर दें।

8. एक मुस्कान जो मीलों पार तक चले

हलकी मुस्कान रखने से शरीर और मन को आराम मिलता है और आप योग आसनों का और अधिक आनंद लेते हैं। शांत मन के साथ, आप अपने शरीर की सीमाओं का वर्धन कर सकते हैं और सामान्य से ज्यादा खिंचाव कर सकते हैं।

9. अपनी सीमाओं को धिक्कारें - एक समय में एक कदम

प्राचीन यौगिक ग्रंथ, पतंजलि योग सूत्र, योग आसन को परिभाषित करता है “स्थिरम सुखम आसनम”।जितना अधिक आराम से आप कर सकते हैं उतना ही करें और फिर थोड़ा सा और तानें (शरीर के लचीलेपन में सुधार के लिये)। एक संदर्भ बिंदु के रूप में श्वास का उपयोग करना याद रखें - जब यह हल्की और लंबी होती है, तो मांसपेशियों को विश्राम मिलना शुरू हो जाता है; लेकिन जब श्वास ऊबड़-खाबड़ या असमान होती है, इसका मतलब है कि आप बहुत अधिक परिश्रम कर रहे हैं।

अपने आराम क्षेत्र से थोड़ा सा बाहर आने से योग अभ्यास दिलचस्प बनेगा और चुनौती की एक चिंगारी को जोड़ देगा जैसे-जैसे आप नए योग आसन में प्रगति करते हैं और उसे अपनाते हैं।

10. आप की ही तरह, हर योग आसन अद्वितीय है

अपने योग अभ्यास में जैसी भी आपकी स्थिति है, इसके साथ खुश रहें और योग कक्षा में अन्य विद्यार्थियों से तुलना न करें। याद रखें कि प्रत्येक शरीर का प्रकार अद्वितीय है और अलग-अलग लोग विशेषज्ञता के विभिन्न स्तरों पर हैं। कुछ लोग एक विशेष योग आसन को आसानी से कर सकते हैं, जबकि अन्य को वहां तक जाने के लिए थोड़ा और समय और अभ्यास की आवश्यकता हो सकती है । इसलिए,अत्यधिक दबाव महसूस न करें और जरुरत से ज्यादा श्रम ना करें। योग आसन करने में आपका लचीलापन और दक्षता नियमित अभ्यास करने से बेहतर हो जायेगी।

यदि आप अभ्यास के प्रारंभिक दिनों के दौरान मांसपेशियों में कुछ दर्द महसूस करते हैं, तो चिंतित न हों। लेकिन अगर दर्द बना रहे, तो तुरंत अपने प्रशिक्षक को सूचित करें। यहाँ मूल बिंदु है अपने योग अभ्यास के साथ नियमित रूप से होना और धैर्य रखना । बस किसी अन्य अनुशासन की तरह, शरीर को योग आसन की आदत पड़ने में कुछ समय लगेगा।

11. पुनःतरोताजा होने के लिये विश्राम करें - योग सुझाव

जैसे ही आप अपने योग आसन अभ्यास को पूरा करते हैं, उठने की और दिन के पंक्तिबद्ध कार्यों को करने के लिये आगे बढ़ना शुरू करने की बहुत अधिक जल्दी में न रहें। योग निद्रा में कुछ मिनट के लिए लेट जाने का विचार अच्छा है, क्योंकि यह शरीर को शीतल करने में मदद करता है और योग आसन अभ्यास के माध्यम से उत्पादित ऊर्जा को समेकित (संचित)करता है।योगनिद्रा योग व्यायाम के बाद मन और शरीर को पूरी तरह से विश्राम देने में भी फायदेमंद है।

आप उचित समय में योग के सूक्ष्म और गहरे लाभों का अनुभव करने में सक्षम होंगे, यदि आप अपने अभ्यास के साथ नियमित रहें। योग में आसन, कालातीत प्राचीन दर्शन, प्राणायाम (साँस लेने की तकनीक) और ध्यान सम्मिलित हैं, जो आपको शरीर के स्तर से परे ले जाता है, एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

आपका शरीर मोमबत्ती की बाती की तरह है और मन उसके चारों ओर की चमक की तरह है। यह "प्राण" या हमारे अंदर की जीवन शक्ति है जो मन को पोषित करता है और शरीर को जीवित रखता है। "प्राणायाम" का अर्थ "प्राण" के आयाम में काम करना है

प्राण शरीर के चारों ओर एक आभामण्डल बनाता है हर समस्या पहले सूक्ष्म स्तर पर और फिर भौतिक स्तर पर प्रकट होती है। शारीरिक रूप से बीमार होने से पहले बीमारी आपके प्राण (प्राणिक शरीर) में दिखाई देती है प्राणायाम आपके चारों ओर पूरी ऊर्जा को स्वच्छ करता है, आपके आभामण्डल को फैलाता है और आत्मा को ऊँचा उठाता है। यह मन में स्पष्टता और शरीर को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।

इसलिए, आप अपने आप को अपना कुछ मूल्यवान समय दें और परिणाम के लिए धैर्य रखें जो आपको अधिक लचीला, स्वस्थ, शांत, कुशल और उत्साही बना देगा। शुभ अभ्यास योगी!

योग के शुरुआती अभ्यासार्थी इसके बारे में भी अधिक जान सकते हैं:

* सूर्य नमस्कार कैसे करें।
* घर पर योग अभ्यास कैसे करें।
* ध्यान के साथ अपनी सुबह उत्साहपूर्वक प्रारम्भ करें।

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कमलेश बरवाल, श्री श्री योग निर्देशक (आर्ट ऑफ लिविंग वेब)

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