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अनाथ प्रीति फिर हुई अनाथ

अनाथ प्रीति फिर हुई अनाथ

मुझे मेरी ससुराल भिजवा दो, यहां मुझे मारते और डांटते हैं
मानसिक विक्षिप्त है प्रीति, 12 दिसम्बर को हुई थी शादी

ग्वालियर|
भईया मुझे मेरी ससुराल भिजवा दो। यहां मुझे अच्छा नहीं लगता है। यहां के लोग मुझे मारते और डांटते हैं। मेरे पति मुझे यहां छोड़ गए हैं और अब मेरी सुध नहीं ले रहे हैं। यहां मुझे बहुत गर्मी लगती है कूलर भी नहीं है। मुझे बुखार और उल्टियां हो रहीं हैं। यह कहना है उस अनाथ प्रीति का जिसकी शादी आज से मात्र पांच माह पहले 12 दिसम्बर 2016 को बेसहारा बच्चों को आसरा देने वाले जनकगंज स्थित माधव बाल निकेतन से दतिया निवासी मनोज प्रजापति से हुई थी। प्रीति का मानसिक संतुलन बिगड़ने के बाद शादी के मात्र 25 दिन बाद उसके ससुरालीजन आश्रम में छोड़ गए हैं। शादी के बाद सहारा मिलने के बाद प्रीति एक बार फिर से अनाथ हो गई। मानसिक रूप से विक्षिप्त प्रीति का दर्द आज माधव बाल निकेतन में कोई सुनने वाला नहीं है।

उल्लेखनीय है कि बचपन में प्रीति के माता-पिता एक दुर्घटना में उससे दूर हो गए थे। पड़ोस में रहने वाली मुंह बोली बुआ ने प्रीति को माधव बाल निकेतन में भर्ती करवा दिया और प्रीति यहां रहने लगी। स्थिति और परिस्थिति के चलते प्रीति अपना मानसिक संतुलन खो बैठी और इसकी हालत बद से बदतर हो गई। जैसे-तैसे तमाम प्रयासों के बाद प्रीति का इलाज तो हुआ, लेकिन वह सामान्य लड़कियों की तरह नहीं सुधर सकी। इन सभी के बावजूद भी अपना भार टालने के उद्देश्य से आश्रम के पदाधिकारियों ने इसकी शादी करवा दी। शादी के कुछ समय बाद उसका मानसिक संतुलन पुन: बिगड़ गया और प्रीति को उसके ससुराल वालो ने शादी के 25 दिन बाद ही आश्रम में छोड़ दिया। अब स्थिति यह है कि प्रीति अपनी ससुराल जाने की गुहार सभी से लगा रही है लेकिन उसकी सुनने वाला यहां कोई नहीं है। कई बार प्रीति बहुत गुमसुुम भी हो जाती है।

यह आश्रम केवल लड़कों के लिए है
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह आश्रम केवल लड़कों के लिए है। यहां लड़कियों को रखना वर्जित है। वर्तमान में इस आश्रम में जिन लड़कियों को रखा जा रहा है वह पूर्ण रूप से अवैध रूप से रह रही हैं। आश्रम के पदाधिकारियों के पास इतना समय भी नहीं है कि इन लड़कियों को उनके यथा स्थान पर पहुंचाया जा सके या प्रशासन की मदद ली जाए।

आश्रम में खूब आता है पैसा और खाना
शहर में माधव आश्रम जैसे कई आश्रम संचालित हैं। इन आश्रमों में खूब पैसा और खाने का सामान आता है। इस पैसे और खाने का क्या होता है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वहीं सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि माधव आश्रम की संपत्ति पर कुछ लोगों की नजर भी लगी हुई है। इस आश्रम को नाम मात्र के लिए ही संचालित किया जा रहा है। इन आश्रमों की मजेदार बात यह है कि यह खाद्य पदार्थ लेने की अपेक्षा पैसे लेना अधिक पसंद करते हैं और पैसे की रसीद भी देना मुनासिब नहीं समझते हैं।

प्रीति विवाह के लिए परिपक्व नहीं थी
समाजसेविका काजल जादौन ने स्वदेश को बताया कि उनकी प्रीति से मुलाकात 13 नवम्बर 2014 को माधव बाल निकेतन में हुई थी। उस समय प्रीति बिलकुल विक्षिप्त थी। काजल ने कहा कि मेरा आश्रम आना जाना लगा रहता था, लेकिन एक दिन से प्रीति का दिखना बंद हो गया। जब मैंने पदाधिकारियों से पूछा कि प्रीति कहां है तो उन्होंने कहा कि उसकी तबीयत खराब है। जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि प्रबंधन ने उसे एक बहुत ही छोटे कमरे में बंद कर रखा है जिसको अपनी कोई सुध नहीं है। उसकी स्थिति उस समय बहुत ही दयनीय थी। जिलाधीश के सहयोग और न्यायालय की अनुमति से मेंने प्रीति को मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवाया। इसके बाद प्रीति में थोड़ा बहुत सुधार हो गया, मगर वह शादी के लिए परिपक्व कतई नहीं थी। मुझे एक दिन पता चला कि प्रीति की शादी हो रही है। मैंने आश्रम प्रबंधन से कहा कि प्रीति शादी के लिए कतई तैयार नहीं है अत: इसकी शादी नहीं कराई जाए। प्रबंधन ने एक न सुनते हुए इसकी शादी जबरदस्ती करवा दी।

प्रबंधन ने यासमीन की शादी के लिए किया मना
प्रीति के साथ वहां एक लड़की यासमीन भी रहती थी। प्रीति के विवाह के कुछ माह बाद यासमीन ने कहा कि मुझे एक लड़का पसंद है आप मेरा विवाह उस लड़के से करवा दो लेकिन आश्रम के अध्यक्ष राकेश रायजादा ने यासमीन का विवाह करने से इंकार कर दिया। इसके उपरांत काजल जादौन ने यासमीन की शादी अपने खर्चें पर करवाई। वर्तमान में यासमीन मुरैना में अपने पति अवधेश शर्मा के साथ रह रही है।

इनका कहना है

‘विवाह के समय प्रीति मानसिक रूप से सही थी। हमने महिला बाल विकास निगम से इसकी शादी की स्वीकृति भी ली थी। प्रीति ससुराल से वापस आ गई है और उसका ईलाज चल रहा है। सही होते ही हम उसको ससुराल भेज देंगे। रही बात यासमीन की तो वह अपनी मर्जी से शादी करना चाहती थी जो हमें स्वीकार नहीं थी इसलिए हमने उससे शादी के लिए मना कर दिया। ’

राकेश रायजादा
अध्यक्ष, माधव बाल निकेतन

‘विवाह के समय हमने वर पक्ष को प्रीति के बारे में सब कुछ बता दिया था। जब वह तैयार हो गए तभी हमने इसकी शादी करवाई है। इसकी तबीयत खराब होने पर वह इसे यहां छोड़ गए हैं। सही होने पर हम इसे वहां भेज देंगे। ’

श्रीमती इंदिरा मंगल
उपाध्यक्ष, माधव बाल निकेतन

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