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तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद महिला एनसीसी की दीक्षांत परेड हुई

तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद महिला एनसीसी की दीक्षांत परेड हुई

ग्वालियर। ग्वालियर की वुमंस अफसर अकादमी की दीक्षांत परेड में सधे हुए कदम, अनुशासन और ग्राउंड पर कमांडेंट को कडक़ सैल्यूट, यह देखकर लगता नहीं था कि तीन महीने पहले ये महिलाएं साधारण थीं, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग के बाद एनसीसी की अफसर बन गईं। ऐसी 68 अफसरों ने शनिवार को ग्वालियर की वुमंस अफसर अकादमी की दीक्षांत परेड में हिस्सा लिया।

देश की एकमात्र वुमंस अफसर अकादमी

शनिवार को देश की एकमात्र वुमंस एनसीसी अफसर ट्रेनिंग अकादमी का परेड ग्राउंड में जैसे ही आर्मी बैंड और बिगुल की आवाज गूंजी, वैसे ही सधे कदमों से 68 अफसर ग्राउंड में आ गईं। इसके बाद बैंड की धुन पर शुरू हो गई, दीक्षांत परेड। इस परेड की सलामी ले रहे थे अकादमी के कमांडेंट, ब्रिगेडियर एसएम इस्माइल। परेड के समय ऐसा लग रहा था कि सभी वुमंस अफसर एक सैनिक हैं और फिर इन अफसरों ने कमांडेंट को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस परेड का नेतृत्व कर्नाटक की थर्ड अफसर देविता ने किया।
नेशनल कैडेट कोर की महिला अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में शनिवार को एक रंगारंग दीक्षांत परेड संपन्न हुई। इस दीक्षांत परेड में अकादमी के कमांडेंट ब्रिगेडियर एसएम इस्माइल एसएम ने परेड की सलामी ली। इस दीक्षांत परेड में जूनियर विंग की 37 और सीनियर विंग की 31 महिला एएनओस ने भाग लिया।

शनिवार को संपन्न हुई इस परेड को कर्नाटका और गोवा निदेशालय की थर्ड अफसर देविता बीएच ने कमांड किया। इस मौके पर उपस्थित प्रशिक्षु अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुए ब्रिगेडियर एसएम इस्माइल ने कहा कि देशभर के विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों से ओटीए में आकर प्रशिक्षण पाने वाली इन महिला अधिकारियों ने तीन माह का कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस दौरान इन्होंने आधारीय सैन्य प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास तथा उपदेशक कौशल का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि ओटीए ग्वालियर देशभर में एक मात्र ऐसा संस्थान है जो पूर्णकालिक महिला अफसर, सहायक एनसीसी अफसर तथा बालिका अनुदेशक को प्रशिक्षण प्रदान करता है। इन प्रशिक्षकों के द्वारा देशभर में कैडेटस को राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक तथा लीडर भावना पैदा करता है। उन्होंने बताया कि एनसीसी देश का सबसे बडा युवा बल है जिसमें लगभग 15 लाख से अधिक कैडेटस हैं। आगे आने वाले समय में इनकी संख्या 25 लाख तक हो जाएगी। इससे पहले कर्नल करनसिंह ने परेड की सलामी ली। वहीं प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट रहने वाली प्रशिक्षु कर्नाटका एवं गोवा निदेशालय की सीनियर विंग की लेफ्टिनेंट गीता के को एनसीसी डीजी का प्लेक ऑफ ऑनर, जूनियर विंग की उडीसा निदेशालय की थर्ड अफसर ममता मोहंती को डीजी का प्लेक ऑफ ऑनर, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना निदेशालय की थर्ड अफसर एम भाविता को बेस्ट फायरर के लिए कमांडेंट का गोल्ड मेडल, वहीं पंजाब हरियाणा निदेशालय की लेफ्टिनेंट नीतू नाशीर को बेस्ट परफोरमेंस में प्रथम आने पर कमांडेंट का गोल्ड मेडल तथा कर्नाटका एवं गोवा निदेशालय की देविता बीएच को बेस्ट इन ड्रिल के लिए सर्टिफिकेट तथा परेड कमांड करने के लिए कमांडेंट का गोल्ड मेडल दिया गया। इस अवसर पर ले. कर्नल प्रतीक सक्सैना सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
सैन्य अफसर जैसी होती है ट्रेनिंग

ग्वालियर की इस अकादमी में ट्रेनिंग पूरी तरह सैन्य तौर-तरीकों से होती है। घंटों जंगल में पैदल चलना, बंदूकों और बड़े हथियारों को चलाना, सभी प्रैक्टिस का हिस्सा होते हैं। तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद इन महिलाओं को बतौर एनसीसी अफसर कमीशन मिलता है। अफसर बनने के बाद ये अफसर देश के कॉलेजों में जाकर नए कैडेट तैयार करती हैं।

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