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डीजी जेल से चार सप्ताह में मांगा जवाब

उच्च न्यायालय ने बिन्दुवार तथ्य प्रस्तुत करने के दिए आदेश
विचाराधीन कैदियों की याचिका पर हुई सुनवाई

ग्वालियर| उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों को आवश्यक सामग्री पर रोक लगाने याचिका पर सुनवाई के दौरान डीजी जेल को आदेश दिया है कि पूरे प्रकरण का बिन्दुवार तथ्य चार सप्ताह में न्यायालय में प्रस्तुत करें। न्यायालय ने 22 जनवरी को डीजी जेल को इस संबंध में नोटिस जारी किया था। मंगलवार को युगल पीठ ने आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए पूछा है कि किस कानून के तहत ये रोक लगाई गई है। इस रोक से प्रदेश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों को उनकी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं नहीं मिल रही हैं।

उच्च न्यायालय ने मांगी तथ्यों की बिन्दुवार जानकारी
याचिका कर्ता की अधिवक्ता संगीता पचौरी ने जानकारी देते हुए बताया कि उच्च न्यायालय ने शासन और डीजी जेल को पूर्व में भेजे नोटिस के परिपालन में आदेश दिया है कि चार सप्ताह में इसकी पूरी जानकारी न्यायालय के समक्ष पेश करें। अधिवक्ता ने बताया कि ये पूरी तरह से गलत है। प्रदेश की सभी जेलों में बंदियों को खान-पान के सामान से लेकर ठंड से बचने के लिए कंबल तक देने से रोक दिया गया है। यहां बता दें कि भोपाल जेल से भागे सिमी आंतकियों की घटना के बाद जेल विभाग ने 9 दिसम्बर 2016 को प्रदेश की सभी जेलों में बंदियों को किसी भी तरह के बाहर के खाने, सामान देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था।

ये है मामला
प्रदेश भर की जेलों में विचाराधीन कैदियों को बाहर की सामग्री पर रोक लगाने के आदेश को लेकर विजय तिवारी निवासी (याचिका क्रमांक 8868/2016) ने उच्च न्यायालय में एक याचिका प्रस्तुत की थी। उच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि विचाराधीन कैदियों को बाहर की सामग्री पर रोक लगाने के मामले में विधानसभा में प्रस्ताव लाए बिना जेल विभाग ऐसे आदेश कैसे दे सकता है।

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