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डग्गेमारी के आगे दर्दनाक हादसों की संवेदना हुई शून्य

हादसों को रोकने के लिए तकनीकी जांच दल एवं सड़कों का ऑडिट कराने की मांग
आगरा। एनएच-2 केवल नाममात्र नाम का हाईवे बनकर रह गया है। शनिवार और रविवार को ट्रांसपोर्ट नगर के पास हुए हुई सड़क दुर्घटना में कुल बारह लोगों की मौत हो गई। बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं प्रशासन की सर्तकता और संवदेना कहीं दिखाई नहीं दे रही। लगातार दो दिन हुए हादसे के बाद भी डग्गेमारी और अवैध कटों को बंदी नहीं किया जा सका है। डग्गेमार वाहनों की वजह से सोमवार को भी पहले जैसी स्थिति बनी हुई थी।

लगातार हादसे, व्यवस्था में कोई सुधार नहीं
हाल ही में खंदारी चौराहे पर बने फ्लाइओवर को बिना किसी तैयारी के खोल देने से यह हादसों को निमंत्रण देता दिख रहा है। डिवाइडरों का अता पता नहीं है। वहीं हाइवे की तरफ से लोहे की रेलिंग भी उखड़ चुकी हैं। जगह-जगह होर्डिंग और अतिक्रमणों का जाल बिछा है सो अलग। रही सही कसर जगह-जगह बन गए तमाम कट और सर्विस रोड किनारे लगे मिट्टी के ढेर वाहन चलाने वालों के लिए बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा है। हादसे के बाद भी ऑटो व रोडवेज की बसों ने बीच हाइवे से सवारी भरना भी बंद नहीं किया है।
हाईवे की सूरत बिगड़ी

रुनकता से लेकर वाटर वक्र्स चौराहे तक तो कहीं से नहीं लगता कि यह नेशनल हाईवे है। तमाम अव्यवस्थाओं के बाद भी एनएचएआई के अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं। एनएच-2 पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने तकरीबन तीन साल पहले फ्लाईओवर, सिक्सलेन प्रोजेक्ट के काम शुरू किए थे। तब से हाईवे की सूरत ही बिगड़ गई। रुनकता चौराहे पर अंडरपाथ का काम अधूरा पड़ा है। इसके आगे चलेंगे तो हाईवे के दोनों ओर की सर्विस लेन को सिक्सलेन में बदलने का काम चल रहा है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। हाईवे की लाइट्स भी खराब पड़ी हैं।
हादसों को निमंत्रण देते अवैध कट

लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार हाईवे को काटकर कट बना लिए हैं। रूनकत्ता से लेकर ट्रांसयमुना तक अवैध कटों की संख्या इतनी अधिक है कि इन्हें बंद किए बिना हादसों को रोकना बेहद मुश्किल है। लेकिन एनएचएआई को इन सबसे कोई सरोकार नहीं है। उनके अफसरों का फोकस एनएच-2 पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर, पुल और अंडरपाथ पर है। सिक्सलेन के लिए दो साल पहले अरतौनी से लेकर सिकंदरा तक के बाजार उजाड़ दिए, अब यहां अस्थायी अतिक्रमण कर लिए गए हैं, लेकिन सिक्सलेन का काम भी आगे नहीं बढ़ सका है।
महानगर की सड़कों के ऑडिट की मांग

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में आगरा में 1062 हादसें हुए जिनमें मृतकों की संख्या 522 और घायलों की संख्या 811 थी। आईआईटी (दिल्ली) द्वारा आयोजित सेमिनार में तथ्य उजागर हुआ कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण आगरा शहर भारतवर्ष में सबसे अधिक दुर्घटनाओं वाला शहर है। आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने कहा कि आगरा की सड़कों का सुरक्षा ऑडिट भी यथाशीघ्र कराया जाये जिसके लिए एक तकनीकि जांच दल का गठन किया जाये जो रिपोर्ट दे कि आखिर सड़क यातायात के लिए आगरा इतना असुरक्षित क्यों है और क्या सड़क पर निरन्तर बढ़ रहे वाहन हादसों की संख्या को और अधिक बढ़ायेंगे?

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