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तिहरे हत्याकांड में 27 साल बाद हुआ फैसला

दो भाइयों को उम्रकैद के साथ तीस हजार जुर्माने की सजा

आगरा| जगदीशपुरा में 27 साल पहले हुए तिहरे हत्याकांड में अपर जिला जज चवन प्रकाश ने दो भाइयों कुंदन व कन्हैया को आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। एक अन्य आरोपी कलुआ को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

प्रार्थी मूंगाराम ने थाना जगदीशपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके चचेरे भाई खूबचंद्र व उसके गांव के श्यामलाल में आपस में जमीन को लेकर वर्ष 1985 से मुकदमेबाजी चल रही थी। दिसंबर में दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया था। अरहर की फसल को लेकर खूबचंद्र और कुंदन पुत्र श्यामलाल में कहासुनी हो गई थी। दस जनवरी 1980 की सुबह खूबचंद्र व उसके लडक़े राजेंद्र उर्फ झल्लो, सुरेन्द्र उर्फ गड्डू, डोरी लाल और अन्य अपने खेतों पर ट्रॉली लेकर पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद श्यामलाल के लडक़े कुंदन, कन्हैया व कलुआ उर्फ दयाराम ने खेत में पानी भरने से रोका। कुंदन व कन्हैया के हाथों में तमंचे तथा कलुआ के हाथ में फरसा था। आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की तथा फरसे से प्रहार कर खूबचंद व उसके दो लडक़े राजेंद्र तथा सुरेंद्र की हत्या कर दी। पुलिस ने घटनास्थल से एक तमंचा व दो कारतूस बरामद किए थे। खूबचंद्र के शरीर में दो गोली, सुरेंद्र के शरीर में एक तथा राजेंद्र के शरीर में दो गोली लगी थी। घटना के समय आरोपी कलुआ, कन्हैया नाबालिग था।

मानसिक रोगी दिखाकर लटकाया था मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. हरीदत्त शर्मा के मुताबिक गवाह डोरीलाल घटना के चश्मदीद गवाह थे। डोरी लाल के अलावा डॉ. डीके सक्सेना, मूंगाराम, देवी प्रसाद, विवेचक महेश चंद्र की गवाही कराई। एक आरोपी ने अपने को मानसिक रोगी बताकर कई साल तक मामले को लटकाने का प्रयास किया था। इस कारण मामले में फैसला आने में 27 साल लग गए। सूत्रों के मुताबिक मामले में जुड़े तथ्यों के कारण ही सजा हुई है।

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