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कलाएं जीवन को लयबद्ध एवं सुसंस्कृत बनाती हैं: राज्यपाल

कलाएं जीवन को लयबद्ध एवं सुसंस्कृत बनाती हैं: राज्यपाल

ग्वालियर। कलाओं का उद्देश्य मनोरंजन नहीं, कलायें संस्कृति को समृद्ध करती हैं। साथ ही मानव जीवन को लयबद्ध एवं सुसंस्कृत बनाती हैं। यह विचार बुधवार को मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति प्रो. ओमप्रकाश कोहली ने ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को बतौर अध्यक्ष संबोधित करते हुए व्यक्त किए। दीक्षांत समारोह में पद्मभूषण स्व. उस्ताद अब्दुल हलीम जाफर खाँ साहब को सितार वादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये मरणोपरांत डीलिट् की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। कुलाधिपति प्रो. कोहली द्वारा उस्तादजी के पुत्र जुनैन हलीम खाँ को यह मानद उपाधि भेंट की गई। राज्यपाल प्रो. कोहली ने कहा कि ग्वालियर केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, देश के विख्यात कलाधर्मी शहरों में शामिल है। उन्होंने कहा ग्वालियर के शासकों ने खुले मन से कला को बढ़ावा दिया। इनमें राजा मानसिंह तोमर प्रमुख हैं। संगीत सम्राट तानसेन व बैजू बाबरा जैसे महान संगीतज्ञ ग्वालियर के ही थे। प्रो. कोहली ने कहा ग्वालियर घराना संगीत के क्षेत्र में अपना अलग स्थान रखता है। यहाँ की ध्रुपद एवं अष्ठांग गायकी का प्रभाव देश के अन्य सांगीतिज्ञ घरानों में दिखाई देता है।

राज्यपाल ने कहा प्रदेश सरकार ने ग्वालियर में संगीत एवं कला विश्वविद्यालय स्थापित कर प्रशंसनीय कार्य किया है। प्रो. कोहली ने कहा कि पूरा विश्व भारतीय कला को सीखकर अपने आप को धन्य और कृतार्थ महसूस करता है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि ग्वालियर के संगीत एवं कला विश्वविद्यालय से कलायें सीखकर निकले विद्यार्थी इस परंपरा को आगे बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय द्वारा सुविख्यात सितार वादक स्व. उस्ताद अब्दुल हलीम जाफर खाँ साहब को डीलिट् की मानद उपाधि प्रदान कर अच्छी परंपरा का निर्वहन किया है। राज्यपाल ने हलीम जाफर खाँ के सुपुत्र उस्ताद जुनैन खाँ एवं दीक्षांत समारोह में पीएचडी, स्वर्ण पदक और स्नातक व स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनायें दीं। महापौर विवेक नारायण शेजवलकर ने संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा कला को बढ़ावा देने के लिये किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा यह विश्वविद्यालय राजा मानसिंह तोमर के सपनों को पूरा कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थियों को यहाँ से जो शिक्षा व संस्कार मिले हैं, उनका उपयोग वे समाज को आगे बढ़ाने और भारतीय संस्कृति को समृद्ध करने में करेंगे। शेजवलकर ने दीक्षांत समारोह में गोल्ड मैडल व उपाधि हासिल करने वाले विद्यार्थियों और उस्ताद हलीम जाफर खाँ साहब के परिजनों को बधाई व शुभकामनायें दीं। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने दीक्षोपदेश दिया। साथ ही दीक्षांत समारोह में शामिल विद्यार्थियों को कला, संस्कृति को बढ़ावा देने व कर्तव्य निर्वहन का वचन दिलाया। साथ ही विद्यार्थियों को उपाधि व गोल्ड मैडल प्रदान किए।

बता दें कि राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का यह पहला दीक्षांत समारोह था, जो स्वयं के परिसर में आयोजित हुआ। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की स्मारिका और अर्धवार्षिक शोध पत्रिका का विमोचन भी किया गया। दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्यगण सहित प्रभारी कुल सचिव उमाशंकर कुलश्रेष्ठ एवं आचार्यगण व छात्र-छात्रायें मौजूद थे। आरंभ में राज्यपाल प्रो. कोहली सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने संगीतमय सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय की कुलगीत "नाद ब्रम्ह साहित्य कला का अदभुत अनुपम संगम है ये" की प्रस्तुति देकर सम्पूर्ण स्वरांग परिसर को संगीतमय बना दिया। विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में तीन शोधार्थी विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि से विभूषित किया गया।

इनमें विनोद कटारे को संगीत, पारूल बांदिल को गायन और भारती परमार को ललितकला के क्षेत्र में शोध के लिये पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। ये तीनों विद्यार्थी विश्वविद्यालय के पहले विद्यार्थी हैं, जिन्हें पीएचडी की उपाधि मिली है। दीक्षांत समारोह में पाँच संकायों के वर्ष 2015-16 के कुल 19 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर परीक्षाओं के स्वर्ण पदक मंच से वितरित किए गए। इनमें 8 स्वर्ण पदक विश्वविद्यालय द्वारा तथा 11 स्वर्ण पदक दानदाताओं द्वारा दिए गए। इसके अलावा विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान हासिल करने वाले 112 विद्यार्थियों को उपाधि और लगभग 500 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ देने की घोषणा भी की गई।

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