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हिन्दुत्व की राह पर उत्तरप्रदेश

हिन्दुत्व की राह पर उत्तरप्रदेश

देश का सबसे बड़ा प्रांत उत्तरप्रदेश अब हिन्दुत्व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राह पर चलने वाला है। पूर्वांचल में गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे 44 वर्षीय योगी आदित्यनाथ को आज उप्र विधायक दल का नेता चुन लिया गया। मूलत: उत्तराखण्ड के रहने वाले योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल को अपनी कर्मभूमि बनाया। पूर्वांचल के साथ-साथ गोरखपुर इलाके में उनका दबदबा बना हुआ है। तभी तो वे छठी बार सांसद चुने गए। उत्तरप्रदेश के विधायकों ने सर्व सम्मति से ऐसे व्यक्ति को विधायक दल का नेता चुना जो सांस्कृतिक राष्टÑवाद के अनुयायी हैं।

पार्टी नेतृत्व ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश तो दिया ही है कि उप्र में जातिवाद और भाई-भतीजावाद की राजनीति को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और प्रदेश की नई दिशा व दशा तय होगी।

यूं कहने को तो चर्चा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के नाम भी मुख्यमंत्री की दौड़ में चले। लेकिन पार्टी नेतृत्व और उप्र के विधायक उप्र की कमान किसी दबंग नेता को देने का मन बनाए हुए थे और अंत में निर्णय भी वही हुआ जो उप्र की जनता नेतृत्व व विधायक दल ने चाहा।

योगी आदित्यनाथ अयोध्या के श्रीराम मंदिर के प्रबल समर्थक माने जाते हैं और कट्टर हिन्दुत्व वादी हैं। उप्र के इतिहास में पहली बार कोई भगवाधारी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रहा है। उप्र की सियासत में अब तक जो जातिवादी व सांप्रदायिक जहर घोल कर जिन लोगों ने भगवा व भाजपा का डर बिठाकर राजनीति की थी इस राजनीति का अंत इस बार उप्र की जनता ने भाजपा को 325 सीटें जिताकर कर दिया और इन सियासी ताकतों को यह संदेश भी दे दिया कि अब उप्र में जनता का भविष्य भाजपा के हाथ में ही सुरक्षित है।

योगी आदित्यनाथ ने विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने के बाद स्वयं यह प्रस्ताव भी रखा कि उप्र के विकास में मेरे साथ दो सहयोगी केशव प्रसाद मौर्य एवं लखनऊ के महापौर दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। उनके इस प्रस्ताव को भी समर्थन मिला। इस हिसाब से उप्र की बागडोर त्रिमूर्ति के हाथों में आ गई है। अब नई भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार एवं भययुक्त प्रदेश बनाने की अहम जिम्मेदारी आ गई है। नई सरकार को उप्र की जनता ने जबर्दस्त समर्थन दिया है। जनता भी अब प्रदेश में आमूल-चूल बदलाव चाहती है। देखना है भाजपा सरकार जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

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