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करुणा और संवेदना के बिना शिक्षा अधूरी: कोहली

शिक्षा व्यक्ति में व्यावसायिक व बौद्धिक क्षमता लाती है

भोपाल| राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली ने कहा है कि करुणा एवं संवेदना के बिना शिक्षा अधूरी है, पूरी शिक्षा वह है जो मनुष्य को मनुष्य बनाए। उसके अन्दर दया, प्रेम, करुणा के भाव जगाए, जिससे वह देश, समाज और परिवार के प्रति अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह करें। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य में व्यावसायिक और बौद्धिक दक्षता के साथ भावनात्मक दक्षता लाना भी है। जो पीछे हैं, जो दु:खी हैं, जो पीड़ित हैं, निर्बल हैं, असहाय हैं, उनके दु:ख दूर करना तथा उनके जीवन को सुखमय बनाने का प्रयास करना शिक्षा का मूल उद्देश्य है।

राज्यपाल श्री कोहली आज विक्रम विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षान्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। विधायक डॉ. मोहन यादव, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति डॉ. शीलसिंधु पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. परीक्षित सिंह, एडीजी व्ही. मधुकुमार, जिलाधीश संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक एमएस वर्मा, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।

इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि माँ, मातृभूमि तथा मातृभाषा से बड़ा कोई नहीं होता, विद्यार्थी हमेशा इसे याद रखें। वे अंग्रेजी अवश्य पढ़ें, परन्तु अंग्रेजियत के गुलाम न बनें। शिक्षा में सामाजिक सरोकार होना आवश्यक है। यदि हम विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकार की शिक्षा नहीं दे रहे हैं तो हम देश को अधूरे नागरिक दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमने राष्ट्र ध्वज को बदल लिया परन्तु अपनी शिक्षा और भाषा नहीं बदली। हमारे अन्दर हिन्दुस्तानी होने का आत्म-गौरव का भाव होना चाहिए।

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