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हार्दिक को आश्वासन और सिब्बल की कारगुजारियों पर वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

हार्दिक को आश्वासन और सिब्बल की कारगुजारियों पर वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस के एक नामी और बौद्धिक कार्यकर्ता नमित वर्मा ने पार्टी की कार्य प्रणाली पर ढ़ेरों सवाल खड़े किए हैं। पार्टी उपाध्यक्ष और अब होने वाले अध्यक्ष राहुल गांधी को लिए पत्र में नमित वर्मा ने लिखा है कि वर्तमान कार्यप्रणाली से कांग्रेस की साख पूरी तरह से खत्म हो गई है। गुजरात चुनावों की चर्चा करते हुए नमित वर्मा ने पार्टी उपाध्यक्ष को लिखा है कि हार्दिक पटेल कह रहे हैं कि हमारी पार्टी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि हम उनके पाटीदार बिरादरी के लिए आरक्षण विधेयक पारित और लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हार्दिक कह रहे हैं कि संविधान की धारा 46 और 31-सी के तहत, और वह भी 50 प्रतिशत आरक्षण के कुल-योग की लक्ष्मण रेखा लाँघकर हम ये करने जा रहे हैं। हार्दिक पटेल द्वारा लगातार किए जा रहे इस प्रचार के बावजूद कॉंग्रेस पार्टी ने इस वक्तव्य का न तो अनुमोदन किया है और न ही खंडन। स्पष्ट है, हमारी यह चुप्पी अत्यंत रहस्य पैदा कर रही है।

राहुल गांधी के हिन्दू धर्म की मान्यताओं को अपनाने को नमित वर्मा ने सही कदम बताया है। नमित वर्मा ने लिखा है कि कॉंग्रेस थियोसोफी के गर्भ से उत्पन्न वैचारिक पार्टी है। आपने हाल ही में शैव मत में अपनी आस्था की बात सार्वजनिक तौर से स्वीकार की। संस्कारों की कसौटी पर खरे उतरने के लिए व्यक्ति एवं संस्थाओं को सत्य को स्वीकार करना तथा इसी सत्य की सुंदरता से स्वयं को अलंकृत करना आवश्यक एवं अनिवार्य है। इतिहास गवाह है कि जब-जब पार्टी ने इस आधारभूत कांग्रेसी संस्कार का परित्याग किया है, तब-तब घोर संकट अथवा विनाश के काले बादलों ने हमे घेर लिया है। पार्टी, सरकार, इतिहास और सामान्य जन के तौर पर जो सीख स्पष्ट दिख रही है, उसे स्वीकार कर आत्मसाध करना ही थियोसोफी और शैव संस्कारों तथा सत्यमेव जयते के हमारे राष्ट्रीय सिद्धांत की कसौटी है|

नमित वर्मा ने अपने पत्र में तीन तलाक और शाहबानो के मामले पर पार्टी की कमजोरी को विस्तार से लिखते हुए कहा है कि मानवता और प्राकृतिक न्याय के प्रति समर्पित कांग्रेसी सोच प्राथमिक तौर पर मोहम्मद अहमद ख़ान बनाम शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले से सहमत थी, परंतु कुछ रूढ़ीवादी नेताओं के हस्तक्षेप तथा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अली मियाँ जैसे मुस्लिम सामाजिक नेतृत्व के द्वारा बनाए गये दवाब के उपरांत कांग्रेस पार्टी ने अपने सार्वजनिक आचरण में बदलाव लाया।

शाहबानो मामले, आयोध्या आंदोलन और फिर कांग्रेस की सत्ता से दूर होते चले जाने के इतिहास को लिखते हुए नमित वर्मा ने कहा है कि इतनी गहरी राजनीतिक शिक्षा के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने गुजरात में पार्टी वार्ताकार कपिल सिब्बल को एक बार फिर आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर ऐसा ही प्रपंच और दुष्परिणामकारी खेल खेलने दिया, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। विडंबना यह है कि यही कपिल सिब्बल अब उच्चतम न्यायालय में बाबरी मस्जिद - अयोध्या मंदिर विवाद मामले की सुनवाई को जुलाई 2019 तक स्थगित करने की मांग रखकर, गुजरात और राष्ट्रभर में, कॉंग्रेस पार्टी को हिंदुओं और मुसलमानों दोनों पक्षों की नज़र में सन्देह्स्पद बना रहे हैं| नमित वर्मा ने भावी पार्टी अध्यक्ष से आग्रह किया है कि आरक्षण के राष्ट्रव्यापी मुद्दे के प्रति खिलवाड़-रहित न्याय-संगत स्पष्टीकरण कर, जनमानस में कांग्रेस की सत्यनिष्ठा प्रमाणित करने के लिए पहल करें।

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