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लोकतांत्रिक समर के कुशल रणनीतिकार नरेन्द्र सिंह तोमर

लोकतांत्रिक समर के कुशल रणनीतिकार नरेन्द्र सिंह तोमर

‘वाटरलू’ से कम नहीं है गुजरात का चुनाव

गुजरात।
दो चरणों में 182 सदस्यों वाली गुजरात विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं गुजरात चुनाव के सह प्रभारी नरेन्द्र सिंह तोमर अहम भूमिका निभा रहे हैं। लोकतांत्रिक समर के कुशल रणनीतिकार के रूप में उभरे केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को गुजरात विधानसभा चुनाव का सह प्रभारी यूं ही नहीं बनाया गया है। मध्य प्रदेश सहित कई प्रदेशों में हुए चुनावों में वे अपनी कुशल रणनीति का कई बार परिचय दे चुके हैं।

विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गणराज्य में विधान सभा के लिए गुजरात का समर किसी भी सियासी पार्टी या तथाकथित ‘क्षत्रप’ के लिए ‘वाटरलू’ से कम नहीं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सत्रह राज्यों में चुनाव हुए हैं। गुजरात अठारहवाँ राज्य है। प्रधानमंत्री रहते मोदी ने विभिन्न राज्यों में 170 चुनावी रैलियाँ की हैं, गुजरात में वह सर्वाधिक 37 रैलियाँ कर दोहरा शतक बनाने जा रहे हैं। सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि ये तमाम रैलियां चुनावी व्यूह-रचना का अहम हिस्सा हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में चुनावी रणनीतिकार के रूप में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और नरेन्द्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा है। अरुण जेटली को चुनाव प्रभारी बनाया गया है तो उजली छवि वाले निर्विवाद केंद्रीय मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर सह प्रभारी हैं। भाजपा आलाकमान की नजर में नरेन्द्र सिंह तोमर की छवि कुशल संगठक और परिश्रमी तथा चतुर चुनावी रणनीतिकार की है। मध्यप्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए श्री तोमर लगातार तीन बार अपनी पार्टी की ताजपोशी करा चुके हैं।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में लगातार बारह वर्ष पूर्ण कर चुके शिवराज सिंह भी श्री तोमर को अपने विजयरथ का सारथी मानते हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में भी अपनी कुशल संगठक-क्षमता का परिचय दे चुके हैं। श्री तोमर 16 मार्च 2010 को जब भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनाये गये और जब उन्हें उप्र का प्रभार सौंपा गया, तब उन्होंने रात-दिन एक कर काम किया। प्रदेश को संगठन की दृष्टि से पाँच से सात भागों में बाँटा और मण्डल स्तर तक कार्यकर्ता सम्मेलन किये। चुनाव में मप्र और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में रहने वाले राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को लगाया। पार्टी आलाकमान ने इसी के मद्देनजर श्री तोमर को गुजरात चुनाव के रणनीतिकार का दायित्व सौंपा है ।

गुजरात विधानसभा चुनाव के सहप्रभारी के रूप में नरेन्द्रसिंह तोमर अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं। श्री तोमर पर प्रधानमंत्री के लिए रैलियों का रोडमैप तैयार करने के साथ-साथ श्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सभाओं, जनसंपर्क रोड शो, प्रचार-प्रसार और दौरा-कार्यक्रम तैयार करने की महती जिम्मेदारी है। पार्टी से मिले निर्देश के मुताबिक अन्य राज्यों के मंत्रियों की ड्यूटी गुजरात में विधानसभावार लगाने का दायित्व भी श्री तोमर पर ही है ।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विधानसभा चुनाव की दृष्टि से गुजरात को चार क्षेत्रों में विभाजित कर रखा है। सेंट्रल जोन जिसमें कुल 61 सीटें हैं , इन्हें नरेन्द्र सिंह तोमर के सुपुर्द किया गया है। श्री तोमर ने मध्य क्षेत्र की 40 और उत्तर क्षेत्र की 21 सीटों को लेकर अद्भुत व्यूह रचना की है।

यहाँ चुनावी-समर को आसान और कारगर बनाने के लिए श्री तोमर ने पेज प्रभारी, बूथ कमेटी और शक्ति केंद्र, विधानसभा स्तरीय समितियों का गठन कर संगठन का विकेन्द्रीकरण कर दिया है। पेज प्रभारी, मतदाता सूची के एक पृष्ठ में जितने मतदाताओं के नाम होंगे, उनसे सम्पर्क और संवाद कर उन्हें मानसिक रूप से पार्टी के पक्ष में मतदान के लिए तैयार करेंगे।

सभी रणनीतिकार अपनी व्यूह रचना में कोई न कोई चूक कर जाते हैं, लेकिन नरेन्द्रसिंह सिंह तोमर के लिए ऐसा कहना बेमानी होगा। चंबल की माटी का यह लाल किसी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ता । चुनावी-समर में पूरी कुमुक को साधना जरूरी है। इसी के चलते जहाँ श्री तोमर ने गुजरात में अति पिछड़ों, वनवासियों और दलितों का महासम्मेलन कर उन्हें साधा वहीं अगड़ों का सम्मेलन कर के उन्होंने अपनी पार्टी के पक्ष में कर लिया है। बीते 20 नवम्बर को श्री तोमर ने भाजपा केलिए छोटा उदयपुर में अनुसूचित जाति-जनजाति का वृहद् सम्मेलन किया, वहीं दूसरी ओर 26 नवम्बर को बड़ोदरा में हिंदीभाषी क्षत्रिय समाज का विशाल राज्य स्तरीय सम्मेलन कर विरोधियों के सामने गंभीर चुनौती पेश कर दी। कार्यकर्ताओं से आत्मीय और भावनात्मक लगाव नरेन्द्र तोमर की खूबी है। हिंदीभाषी प्रदेश उप्र, राजस्थान मप्र, छत्तीसगढ़ के राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की जिस टीम को श्री तोमर ने गुजरात में उतारा है, उनकी बैठकें करके न केवल वह फीडबैक लेते हैं, बल्कि सतत: संवाद बनाये रखकर वह उनके ठहरने, खाने-पीने के इंतजाम के बारे में भी जानकारी लेते रहते हैं ।

सही मायने में नेतृत्व का सर्वोच्च गुण ‘आत्मीयता’ ही है जो विशाल होकर ‘एकात्मता’ में तब्दील हो जाती है। भाजपा की रहनुमाई में जो गुजरात देश में विकास का ‘रोल मॉडल’ बन चुका है , उसे ‘खुश रहे गुजरात’ का कोरा झुनझुना देकर कोई अन्य पार्टी बरगला नहीं सकती । कह सकते हैं कि नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुजरात के मतदाताओं के बीच ‘आत्मीयता’ की जो मशाल जलाई है उससे प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अमित शाह की राह आसान हो गई है। नौ और 14 दिसम्बर को होने वाला मतदान इस बात का गवाह होगा ।

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