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हॉटलाइन की तीन कंपनियों की लीज निरस्त

हॉटलाइन की तीन कंपनियों की लीज निरस्त

-10 साल से काम है ठप

ग्वालियर/ विशेष प्रतिनिधि।
लगभग अट्ठाईस साल पहले औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में पैर पसारने वाली हॉटलाइन गु्रप की तीन कंपनियों की लीज आईआईडीसी ने इन्हे ‘लैसी’ घोषित करते हुए निरस्त कर दी है। इन कंपनियों के नाम हॉटलाइन टेली ट्यूब एवं कम्पोनेंट, हॉटलाइन ग्लास और हॉटलाइन सीपीटी हैं।

यह तीनों कंपनिया वर्ष 2007 से बंद हैं और इनकी इमारतें कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि भारत में जब टी.वी. का प्रसारण शुरू हुआ था, उसके बाद रंगीन पिक्चर ट्यूब बनाने का काम हॉटलाइन कंपनी ने मालनपुर में शुरू किया था। जिससे इस कंपनी को काफी ख्याति मिली थी और कंपनी ने अपना विस्तार करते हुए मालनपुर में ही दो और कंपनिया हॉटलाइन ग्लास एवं हॉटलाइन सीपीटी भी डाल ली थीं। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अग्रवाल थे, तक तक कंपनी ने काफी प्रगति की उनके निधन के बाद उनके भाई अनिल गुप्ता ने कामकाज संभाला लेकिन बाद में उनका भी निधन हो गया। ऐसे में कंपनी आर्थिक तंगी झेलते हुए पतन की ओर बढ़ने लगी। मालनपुर में लगभग दस साल पहले इन तीनों कंपनियों में काम बंद हो गया और प्रबंधन भी यहां से चला गया। फिर इनकी इमारते कबाडेÞ में तब्दील हो गई। इस बीच कबाड़ में तब्दील मशीनरी बेचने पर भी विवाद पैदा हुआ। इनमें हॉटलाइन टेलीट्यूब एण्ड कम्पोनेंट को 50 हजार वर्गमीटर जमीन लीज पर दी गई थी, जिस पर कंपनी द्वारा 89 लाख 97 हजार 085 रुपए जमा नहीं किए गए। आईआईडीसी के महाप्रबंधक सतेन्द्र सिंह ने 2 नवम्बर 2017 को इस कंपनी को ‘लैसी’ घोषित करते हुए लीज निरस्त कर दी है।

इसी तरह हॉटलाइन ग्लास को 1 लाख 16 हजार 971 वर्गमीटर भूमि मिली थी, जिस पर 2 करोड़ 38 लाख 10 हजार 488 रुपए बकाया है। हाटलाइन सीपीटी को भी लगभग सवा तीन लाख वर्गमीटर जमीन उपलब्ध कराई गई थी, उसने भी लीज का 4 करोड़ 77 लाख 83 हजार 405 रुपए जमा नहीं किए, जिस पर 18 अक्टूबर 2017 को इसकी इसकी लीज निरस्त की गई।
आईआईडीसी के महाप्रबंधक ने इन तीनों कंपनियों की लीज निरस्त करने से पहले कई बार पत्र लिखकर सूचित किया था कि 6 माह तक निरंतर काम बंद होने पर लीज निरस्त कर दी जाएगी और वर्ष 2007 से इन कंपनियों ने काम शुरू करने की कोई जानकारी नहीं दी, बल्कि सिर्फ यह सूचना आई कि आर्थिक कारणों से कंपनी बंद हैं। चूंकि इकाई बीआईएफआर में पंजीकृत है, इसे आर्थिक सहायता मिलने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा।

इनकी भी हुई लीज निरस्त

इसी के साथ बीमार उद्योग घोषित होने के कारण बामौर में दयाल इंडस्ट्रीज, अमन शेट्टी, विनायक इन्डस्ट्रीज, तिवारी इन्डस्ट्रीज, हर्षवुड प्लायवुड की लीज भी निरस्त की जा चुकी है। जबकि बामौर और मालनपुर में कई और उद्योग हैं जो दम तोड़ चुके हैं, इन इकाइयों को भी नोटिस जारी हुए हैं, इनमें से तमाम इकाइयों ने किसी दूसरी पार्टी से सौदा कर लिया है, लेकिन हस्तांतरण की कार्यवाही लटकी हुई है।

मार्क अस्पताल का भी है विवाद

गोला का मंदिर पर हाटलाइन गु्रप को मुकेश अग्रवाल मेमोरियल ट्रस्ट के नाम लगभग 20 एकड़ जमीन वर्ष 1998 में आवंटित हुई थी, कुछ समय यहां मार्क अस्पताल चला, फिर बंद हो गया। तत्कालीन कलेक्टर डॉ. संजय गोयल ने इस जमीन को महिला एवं बाल विकास विभाग को आवंटित कर दिया। इस बीच गु्रप के चेयरमैन अनुज गुप्ता ने यह जमीन अस्पताल से हटाकर किसी अन्य विभाग को आवंटित करने पर आपत्ति जताई है।

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