Home > Archived > अद्वैत दर्शन में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता : शिवराज

अद्वैत दर्शन में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता : शिवराज

अद्वैत दर्शन में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता : शिवराज


भोपाल । ओंकारेश्वर, उज्जैन, पचमठा (रीवा) एवं अमरकंटक से 19 दिसंबर को एक साथ शुरू हुई एकात्म यात्रा अब प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शंकराचार्य की जन्मस्थली आदि शंकर निलयम, एर्नाकुलम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व भारत ने विश्व कल्याण का मंत्र दिया। भौतिकता की अग्नि में दग्ध विश्व को शांति का संदेश कोई दे सकता है तो वो है जगतगुरु आदि शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का दर्शन।

मुख्यमंत्री ने आदि गुरु शंकराचार्य की जन्मस्थली आदि शंकर निलयम, वलियानार्ड, एर्नाकुलम से ध्वज दिखाकर एकात्म यात्रा शंकर संदेश वाहिनी को रवाना किया। ये 10 हजार किमी की यात्रा कर कलिडी, शृंगेरी, कांची, द्वारका, जोशीमठ, हरिद्वार, वाराणसी से होते हुए 22 जनवरी को ओंकारेश्वर पहुंचेगी।

केरल के कोच्चि जिले के आदि शंकर निलयम, वेलियानाड में 'एकात्म यात्रा' की श्रृंखला में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि पूरे विश्व में आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन का प्रचार-प्रसार करने के लिये प्रदेश के ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य सांस्कृतिक एकता न्यास की स्थापना की जायेगी।

न्याय के जरिये अद्वैत दर्शन पर शोध और अध्ययन का काम होगा। उन्होंने शंकर संदेश वाहिनी को ध्वज दिखाकर रवाना किया। यह वाहिनी कलाडि, श्रृंगेरी, काँची, द्वारका, जोशीमठ, हरिद्वार, वाराणसी से होते हुए 22 जनवरी को ओंकारेश्वर पहुँचेगी। श्री चौहान ने कहा कि अद्वैत दर्शन में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है। यह युग की धारा बदल देने वाला दर्शन है। आतंकवाद और वैमनस्यता जैसी बुराइयों को समाप्त कर देगा। उन्होंने कहा कि अद्वैत दर्शन का ज्ञान होने पर ही पता चलता है कि इस जगत के सभी जीवों, अवयवों में एक ही चेतना का वास है। इसलिये सभी एक ही चेतना से आपस में जुडे हैं। इसी दर्शन के कारण भारत में प्रकृति की आराधना होती है। नदियों को पूजा जाता है। उन्हें परम चेतना से अलग नहीं मानते। उन्होंने कहा कि अद्वैत दर्शन आम लोगों के बीच जाना चाहिये। केवल मंदिरों, मठों और विद्वानों तक सीमित नहीं रहना चाहिये। इसका विस्तार ही कल्याणकारी है। आदि शंकराचार्य ने भारत की सांस्कृतिक एकता को स्थापित किया और मानवता को शांति और धर्म की राह दिखाई।

Share it
Top