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मध्यप्रदेश के गांवों में गढ़े जाएंगे वैज्ञानिक

मध्यप्रदेश के गांवों में गढ़े जाएंगे वैज्ञानिक

-अटल इनोवेशन मिशन में प्रदेश के सौ स्कूल
नई दिल्ली। अब हर जिले में वैज्ञानिक तैयार होंगे। खासकर गांव के नौनिहालों की प्रतिभा को निखारने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अभिनव पहल की गई है। अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) में देश भर से चयनित किए गए 1500 स्कूलों में सौ मप्र के भी स्कूल शामिल किए गए हैं। इन स्कूलों में कक्षा-6 से 12 तक के प्रतिभावान छात्रों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स जैसे कार्यों में सिद्धहस्त किया जाएगा।

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के तहत अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्थापना की जाएगी। इसके लिए देशभर से 1500 स्कूलों का चयन किया गया है। जिसमें मप्र के सौ स्कूलों को भी शामिल किया गया है। इसमें राज्य के लगभग जिलों के उन स्कूलों को लिया गया है जहां छात्र और शिक्षकों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक है। राज्य के शासकीय स्कूलों के अलावा उन निजी विद्यालयों को भी लिया गया है, जो एआईएम के प्रतिभा निखारने वाली योजना के हिस्सेदार बनना चाहते थे। दरअसल, इस योजना का काम पिछले एक साल से चल रहा था। इसमें पहले देश के चुनिंदा स्कूलों को लेने की योजना थी, बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को ज्यादा महत्व दिया गया। यह योजना ऐसे प्रतिभावान छात्रों के लिए कारगर होगी जो विज्ञान में रूचि रखते हैं, लेकिन सुविधा की कमी के कारण उनकी प्रतिभा दम तोड़ देती है।

इसके लिए नीति आयोग की तरफ से प्रत्येक स्कूल को 10 लाख रूपए की सहायता दी जाएगी, जिसमें वह स्कूल अपने यहां लैब तैयार कराएगा। उस लैब में छात्रों को वैसी ही सुविधाएं मुहैया होंगी, जो मैट्रो शहर के छात्रों को होती हैं। यह योजना कक्षा-6 से 12 तक छात्रों के लिए है। चयनित किए गए स्कूलों में छात्रों को कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जो छात्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में रूचि रखता है, उसे लैब में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्स, संवेदी प्रौद्योगिकी किट, इंटरनेट आॅफ थिंग्स (आईओटी), सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रयोगिक कायज् कराए जाएंगे। छात्रों में खुद से करो, खुद को साबित करो का भाव पैदा किया जाएगा। नीति आयोग इस योजना के जरिए भारत को अभिनव प्रयोग वाला अभिनव देश के रूप में उभारना चाहता है। इसके लिए साल 2022 तक छात्रों की ऐसी फौज खड़ी करने की योजना है, जो देश में अविष्कार की फेहरिस्त तैयार कर सके। केन्द्र सरकार जानती है कि अधिकांश प्रतिभाएं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधा नहीं मिलने के कारण थम जाती हैं। इसलिए अटल इनोवेशन मिशन में ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल को खास फोकस किया गया है। नीति आयोग की इस महत्वाकांक्षी योजना का उदेश्य 10 बच्चों को निओटेरिक इनोवेटरझ् के रूप में निखारना है। निओटेरिक का अर्थ है- एक ऐसा व्यक्ति जो नए विचारों की वकालत करता है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार देश में विज्ञान को जानने समझने वालों की ऐसी खेप तैयार करने में जुट गई है, जिससे भारत दुनिया में किसी के पीछे नहीं रहे।

मप्र के चयनित स्कूल

अशोकनगर-1, गुना-1, बड़वानी-1, बेतूल-1, भोपाल-3, बुरहानपुर-1, छतरपुर-4, दमोह-1, धार-1, हर्दा-1, होशंगाबाद-1, इन्दौर-7, जबलपुर-5, जावरा-1,कटनी-3, खंडवा-2. खरगोन-1, मंदसौर-3, मुरैना-1, नरसिंहपुर-3, नीमच-3, पन्ना-2, रायसेन-1, राजगढ़-7, रतलाम-1, रीवा-4, सागर-4, सतना-2, सिहोर-3, सिवनी-1, शहडोल-1, शाजापुर-8, शिवपुरी-2, सीधी-6, सिंगरौली-3, टीकमगढ़-1, उज्जैन-5, उमरिया-1, विदिशा-3।

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