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तीन साल से खराब पड़े हैं रोकड़ संग्रह केन्द्रों के सीसीटीवी

तीन साल से खराब पड़े हैं रोकड़ संग्रह केन्द्रों के सीसीटीवी

लूट या चोरी की घटना हो जाए तो कौन होगा जिम्मेदार ।



सुधारने को तैयार नहीं ठेकेदार, बिजली कम्पनी भी नहीं दे रही ध्यान ।

ग्वालियर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी शहर वृत्त ग्वालियर के रोकड़ संग्रह केन्द्रों (कैश काउंटरों) पर सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए सीसीटीवी पिछले करीब तीन साल से खराब पड़े हुए हैं, लेकिन इन कैमरों को सुधारने के लिए न तो ठेकेदार तैयार है और न ही बिजली कम्पनी के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी रोकड़ संग्रह केन्द्र पर यदि लूट या चोरी जैसी कोई घटना हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर भर में बिजली कम्पनी के 20 रोकड़ संग्रह केन्द्र हैं। इन केन्द्रों पर प्रतिदिन लाखों की राजस्व वसूली होती है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य महाप्रबंधक के आदेश पर झांसी की इनोवेटिव कम्प्यूटर टैक्नोलॉजी के माध्यम से वर्ष 2013 में प्रत्येक रोकड़ संग्रह केन्द्र पर दो-दो सीसीटीवी कुल 40 कैमरे लगवाए गए थे। उक्त कम्पनी को अनुबंध के अनुसार मई 2017 तक इन कैमरों की समुचित देखरेख और संधारण करना था, लेकिन इसके बाद ठेकेदार कम्पनी ने इन कैमरों के संधारण पर कतर्इं ध्यान नहीं दिया। इसके चलते एक के बाद एक सीसीटीवी खराब होते चले गए। सूत्रों की मानें तो पिछले तीन साल से अधिकांश रोकड़ संग्रह केन्द्रों के सीसीटीवी खराब पड़े हुए हैं, लेकिन बिजली कम्पनी ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि बिजली कम्पनी द्वारा कैमरों को ठीक करने के लिए ठेकेदार कम्पनी को कई बार पत्र लिखे गए। इस पर ठेकेदार कम्पनी के कर्मचारी आए भी, लेकिन वे कैमरों को ठीक करने की वजाय कुछ कैमरों को निकालकर ले गए, जो अब तक वापस नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में इन केन्द्रों पर कार्यरत कर्मचारियों की जान माल को खतरा बना हुआ है।

जानबूझकर खराब किए गए हैं कैमरे ।

बिजली कम्पनी से जुड़े सूत्रों की बात पर यकीन करें तो अधिकांश रोकड़ संग्रह केन्द्रों पर बिलों में सुधार करने के नाम पर लेन-देन का खेल चलता है। कर्मचारियों की यह करतूत सीसीटीवी में कैद न हो जाए, इसलिए अधिकांश कैमरे जानबूझकर खराब किए गए हैं। इसी कारण ठेकेदार कम्पनी ने भी इन कैमरों को ठीक करने से अपने हाथ खड़े कर दिए और उसने बीच में ही काम छोड़ दिया। यही नहीं, शहर और राज्य से बाहर झांसी की कम्पनी को सीसीटीवी लगाने का ठेका दिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बिजली कम्पनी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि किसी स्थानीय कम्पनी को इसका ठेका दिया गया होता तो उस पर दवाब बनाकर कैमरे ठीक कराए जा सकते थे। बताया गया है कि सीसीटीवी की देखरेख की जिम्मेदारी बिजली कम्पनी के आईटी सेल की भी है, लेकिन आईटी सेल के अधिकारी अपनी इस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की भी व्यवस्था नहीं ।

बिजली कम्पनी के रोकड़ संग्रह केन्द्र भगवान भरोसे चल रहे हैं। यहां लगाए गए सीसीटीवी जहां खराब पड़े हुए हैं तो वहीं सशस्त्र सुरक्षा गार्ड भी तैनात नहीं हैं। अधिकांश रोकड़ संग्रह केन्द्रों पर एकत्रित होने वाली लाखों की राशि सुरक्षित रखने के लिए तिजोरी तक नहीं है, जबकि शासन के नियम अनुसार प्रत्येक रोकड़ संग्रह केन्द्र पर एक तिजोरी होना चाहिए। बताया गया है कि रोकड़ संग्रह केन्द्रों से राशि एकत्रित कर बैंक में जमा कराने का ठेका इंडसइंड बैंक सिटी सेन्टर का है। उक्त बैंक के केवल दो वाहन राशि प्राप्त करने के लिए आते हैं। यह दोनों वाहन अपरान्ह चार बजे से दस-दस रोकड़ संग्रह केन्द्रों से राशि एकत्रित करते हैं। इसके चलते केन्द्रों के कर्मचारियों को बैंक के वाहन के आने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी रोकड़ संग्रह केन्द्र पर चोरी या लूट की वारदात हो जाए तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। इस सवाल का जवाब बिजली कम्पनी के अधिकारियों के पास नहीं है। बताया गया है कि दो साल पूर्व भोपाल में शहर संभाग उत्तर के रोकड़ संग्रह केन्द्र में दिनदहाड़े एक महिला कर्मचारी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद भी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी अपने रोकड़ संग्रह केन्द्रों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नहीं है।

इनका कहना है ।

‘‘सभी रोकड़ संग्रह केन्द्रों के सीसीटीवी खराब नहीं हो सकते। यदि यह सही है तो मैं अभी अपने अधीनस्थों से जानकारी लेता हूं।’’

डी.पी. अहिरवार
मुख्य महाप्रबंधक
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ग्वालियर

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