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लैब तकनीशियन को साहूकार ने मारी गोली

लैब तकनीशियन को साहूकार ने मारी गोली

ब्याज पर दिए थे दस हजार रुपए, बदले में जमा करा ली थी चेकबुक व एटीएम कार्ड ।


ग्वालियर । साहूकार से अपनी चेकबुक और एटीएम कार्ड वापस मांगना कर्जदार को महंगा पड़ गया। साहूकार और उसके साथी ने कार्यालय में जाकर लेन-देन के विवाद पर लैब तकनीशियन को गोली मार दी। गोली मारने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश प्रारंभ कर दी है।

चौरसिया कॉलोनी, नादरिया माता, गुढ़ा पर रहने वाले नरेन्द्र पुत्र हरिबल्लभ चौरसिया उम्र 49 साल गोले का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित पशु चिकित्सालय में लैब तकनीशियन के पद पर कार्यरत हैं। नरेन्द्र ने संतोष शर्मा से दस हजार रुपए उधार लिए थे। संतोष ने रुपए देने के बदले नरेन्द्र का एटीएम कार्ड और बैंक की चेकबुक अपने पास रख ली थी। मंगलवार को नरेन्द्र ने अपना एटीएम कार्ड और चेकबुक संतोष से फोन करके वापस मांगी तो संतोष ने दोपहर में आने की बात कही। नरेन्द्र ने अपेन बेटे कुणाल को फोन करके बुला लिया था कि संतोष चेकबुक और एटीएम कार्ड देने आ रहा है। मध्यान्ह पौने तीन बजे के करीब नरेन्द्र पशु चिकित्सालय में बैठा था तभी संतोष शर्मा निवासी घोसीपुरा, शिवेन्द्र परिहार निवासी अजयपुर दो अन्य युवकों के साथ आया और उसका नरेन्द्र से लेन-देन को लेकर विवाद हो गया। नरेन्द्र के बेटे कुणाल का कहना है कि लेन-देन के विवाद पर संतोष शर्मा, शिवेन्द्र और उसके दो साथियों ने उसके पिता नरेन्द्र को गोली मार दी। गोली नरेन्द्र की जांघ में धंस गई। बेटे कुणाल के सामने चारों लोग लैब तकनीशियन नरेन्द्र को कार्यालय में ही गोली मारकर फरार हो गए। पिता को घायल देख कुणाल ने पुलिस को घटना की सूचना दी। कुणाल और उसका दोस्त गोलू पाठक घायल नरेन्द्र चौरसिया को लेकर ट्रोमा सेंटर पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई और घायल की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश प्रारंभ कर दी है।

पांच माह से वेतन निकाल रहा था संतोष

नरेन्द्र चौरसिया के बेटे कुणाल ने बताया कि उसके पिता ने पांच माह पहले संतोष शर्मा से दस हजार रुपए उधार लिए थे। बदले में संतोष शर्मा ने एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने पास रख ली थी। पांच माह से संतोष शर्मा ही उसके पिता का वेतन बैंक से निकाल रहा था। यह बात उसके पिता ने परिजनों से छिपाकर रखी थी। संतोष शर्मा ने दस हजार रुपए के बदले पांच माह का वेतन ले लिया था। उसके बाद भी वह एटीएम कार्ड व चेकबुक देने को तैयार नहीं था।

गोली चलते ही छिप गया बेटा

संतोष शर्मा और उसके साथियों से नरेन्द्र का लेन-देन को लेकर विवाद हो रहा था। उसी समय नरेन्द्र का बेटा कुणाल अपने साथी के साथ पहुंच गया। गोली चलते ही कुणाल ने पेड़ के पीछे छिपकर अपनी जान बचाई।

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