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तीस्ता सीतलवाड को सुप्रीम कोर्ट से झटका, खाते डिफ्रीज करने की अर्जी खारिज

तीस्ता सीतलवाड को सुप्रीम कोर्ट से झटका, खाते डिफ्रीज करने की अर्जी खारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड को झटका दिया है। कोर्ट ने उनके एनजीओ नवरंग ट्रस्ट के बैंक खातों को डिफ्रीज करने की अर्जी खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी चार याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये खाता 2015 में गुजरात पुलिस ने फ्रीज कर दिया था। तीस्ता पर आरोप है कि उन्होंने दंगा पीड़ितों के लिए मिले पैसों का इस्तेमाल शराब पीने, महंगे मोबाइल खरीदने जैसे निजी कामों के लिए किया।

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने कहा कि तीस्ता के एनजीओ को धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के लिए पैसे मिले जो व्यक्तिगत खर्चों जैसे शराब वगैरह में खर्च किए गए। तीस्ता की ओर से कहा गया कि शराब के लिए केवल सात हजार आठ सौ पचास रुपये खर्च किए गए जिसे फोर्ड फाउंडेशन ने स्वीकृत कर दिया। फोर्ड फाउंडेशन ने ही तीस्ता के एनजीओ को पैसे दिए थे। तीस्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार उन्हें केवल परेशान कर उनके कामों को बंद करवाना चाहती है।

तीस्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा था कि गुजरात पुलिस ने तीस्ता के दो निजी खातों के अलावा सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस संगठन का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया है, जबकि आरोप सबरंग ट्रस्ट पर लगे हैं।

तीस्ता सीतलवाड और जावेद इफ्तिखार अहमद पर चंदे ही हेराफेरी का केस दर्ज किया गया है। ये चंदे 2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्गा सोयायटी में हुई तबाही की याद में म्यूजियम बनाने के लिए इकट्ठे किए गए थे। गुजरात हाईकोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी। गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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