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दुनिया चाहती है भारत उसे राह दिखाए, लेकिन इसके लिए समर्थ बनना होगा : डॉ. मोहन राव भागवत

दुनिया चाहती है भारत उसे राह दिखाए, लेकिन इसके लिए समर्थ बनना होगा : डॉ. मोहन राव भागवत

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी ने कहा कि दुनिया चाहती है कि भारत उसे राह दिखाए और उसका नेतृत्व करें। भारत दुनिया को राह दिखा सके, इसके लिए भारत को समर्थ बनाना होगा। भारत के प्रत्येक व्यक्ति को अगर आवश्यकता है तो सेवा देकर ऐसा समर्थ बनाना होगा कि वह स्वयं समर्थ बनकर दुनिया को अपनी सेवाएं दे सके। रविवार को जयपुर में सेवा भारती के नवनिर्मित भवन सेवा सदन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया पूर्व की तरफ देखती है तो उसे भारत और चीन ही दिखाई देते हैं। लेकिन चीन के बारे में लोगों के मन में शंका है। उसको दूर करना चीन का ही काम है। उसके बारे में मुझे कोई बोलने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यह वास्तविक स्थिति है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण दुनिया में भारत से संदेश की मांग है। भारत से रास्ता दिखाने की मांग है। दुनिया में यह लक्षण दिखाई दे रहे हैं। दुनिया प्रयोग करके थक चुकी है, उसको रास्ता नहीं मिल रहा है। अब वह राह देख रही है कि भारत आएगा।

उन्होंने कहा कि सेवा, यह काम बोलने का नहीं करने का है। अच्छे- अच्छे काम होते हैं, आगे भी होते रहें इसलिए उसके बारे में बोलना - लिखना पड़ता है। परन्तु सेवा कार्य को वास्तविक रूप में करना ही उसका सुंदर वर्णन होता है। भारत स्वयं समर्थ बनकर दुनिया को अपनी सेवाएं दे सके ऐसा भारत वर्ष खड़ा करने के लिए सब अच्छे कामों के बढ़ाने की आवश्यकता है। सेवा भारती का भी काम बढ़ना चाहिए। भवन के अनुपात में कार्य का विस्तार और दृढ़ता बढ़नी चाहिए। भवन में कार्य की प्रेरणा बढ़ाने वाला वातावरण मिले।

सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी ने कहा की सेवा सदन में जो भी काम होंगे उसमें सेवा भावना का भाव जगना चाहिए। ऐसा वातारण इस भवन का रखना और कार्य को बढ़ाना यह दायित्व हम सब लोगों के सिर पर आया है। इस दायित्व का भान हम सब लोग रखें। सेवा भारती का सात मंजिला भवन खड़ा हुआ है तो हमारा काम सात गुना बढ़ना चाहिए। समाज में व्याप्त अभाव ग्रस्तता को दूर कर सारे समाज को एक स्वावलंबी और समर्थ समाज बनाकर खड़ा करने की आवश्यकता है। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भवन निर्माण का आनंद कल के अपने कार्य सिद्धी के आनंद में परिवर्तित हो।

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि समाज निर्माण में सेवा भारती ने बड़ा काम किया है। सेवा का काम ढिंढोरा पीटकर नहीं किया जा सकता है। यह काम तो ऐसा तो है कि दायें हाथ यह नहीं मालूम होना चाहिए कि बायां हाथ क्या कर रहा है तब तो उसे सेवा माना जाता है। इस काम को सेवा भारती अच्छे से कर रही है। सेवा, संस्कार, स्वावलंबन और समरसता बढ़ाने में सेवा भारती ने लगकर कोशिश की है। कन्या पूजन, बाल संस्कार शिविर, सर्वजातीय सामूहिक विवाह और समरसता यज्ञ के माध्यम से सेवा भारती समाज निर्माण के काम में जुटी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समरसता का अभाव अब होने लगा है। वर्ष 2003 और 2008 के बीच में जब हम लोग बीच में जाया करते थे। तो इतनी बुरी स्थिति नहीं थी जो आज हमको देखने को मिल रही है। एक जाति दूसरी जाति से झगड़ रही है। ऐसे में समाज निर्माण का जो काम सेवा भारती ने हाथ में लिया है वह सबसे बड़ा है। समारोह में क्षेत्र संघचालक डॉ. भगवती प्रसाद, सेवा भारती के राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामस्वरूप जोशी समेत संघ के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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