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तीन साल में ग्राम सड़क योजना पर एक लाख करोड़ खर्च करने की योजना

तीन साल में ग्राम सड़क योजना पर एक लाख करोड़ खर्च करने की योजना

-तोमर ने बनाया ग्राम स्वावलंबन का नया प्लानर्
नई दिल्ली। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने ग्रामीण क्षेत्रों को स्वावलंबी बनाने के लिए खास प्लान बनाए हैं। अगले तीन साल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से एक लाख करोड़ रूपए खर्च करके गांवों का आवागमन दुरुस्त किया जाएगा। इससे रोजगार, कारोबार के नए रास्ते तैयार होंगे और गांव का पलायन रुकने के साथ स्थानीय नौजवान आत्मनिर्भर बन सकेंगे। तोमर द्वारा राज्य सरकारों के साथ मिलकर पीएमजीएसवाई के तहत नई सड़कों का निर्माण, पहले से निर्मित सड़कों की मरम्मत और रखरखाव और देश के नक्सल प्रभावित जिलों में सड़कों के निर्माण पर लगभग एक लाख करोड़ रूपए खर्च करने की योजना बनाई गई है। सूत्र बताते हैं कि 90,000 करोड़ देश की सभी ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर तथा 11,000 करोड़ रुपए नक्सल प्रभावित जिलों की सड़क नेटवर्क को ठीक करने पर खर्च किए जाएंगे। यह काम उन सभी 65,000 आवासीय इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के कार्य पर खर्च किया जाएगा जो पिछले डेढ़ दशक से मुख्य मार्ग को लेकर उपेक्षित थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार अगले तीन साल में ग्रामीण सड़कों पर खर्च की जाने वाली एक लाख की धनराशि में 65,000 करोड़ रुपए की राशि केन्द्र की ओर से दी जाएगी, जबकि शेष राशि राज्यों द्वारा दी जाएगी। 2017-18 के आम बजट में केन्द्र सरकार द्वारा पीएमजीएसवाई के लिए 19,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। सूत्र बताते हैं कि 2017-18 में केन्द्र ने ग्रामीण इलाकों में लगभग 59,000 किमी सड़कों के निर्माण की योजना बनाई है।

जो प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 150 किलोमीटर की दर होगी। वहीं सड़क निर्माण की यह रफ्तार 2016-17 में 133 किमी रही है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद तोमर द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई थी। देश के सभी ग्रामीण क्षेत्र की सड़क की हालत जानने के बाद उनके निर्देश पर ऐसी कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे सड़क व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं स्थानीय नौजवानों को काम की तलाश में घर नहीं छोड़ना पड़ेगा। स्थानीय उत्पादन की बाजार तक पहुंच आसान हो जाएगी और इससे गांवों के स्वावलंबन का नया रास्ता तैयार होगा।

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