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हॉकर्स जोन खाली, सड़कों पर फिर कारोबार

हॉकर्स जोन खाली, सड़कों पर फिर कारोबार

-ठीक से नहीं हो रही देख रेख, तमाम दावों के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
-करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए हॉकर्स जोन पड़े हैं खाली

ग्वालियर।
शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम का अमला सुबह से ही गश्त पर निकलता है, और सभी स्थानों पर नीले रंग की गाड़ी सिर्फ सायरन बजाती हुई निकलती है। इसके बाद भी नतीजा शून्य। बाजारों और सड़कों के किनारे जो अतिक्रमण जहां थे, फिर से वहीं हैं। इस अव्यवस्था से रोजाना सुबह से शाम तक यातायात जाम होता है, जिससे शहरवासी परेशान हैं। नगर निगम का मदाखलत अमला रोजाना कार्रवाई के दावे तो करता है, लेकिन अब तक अतिक्रमण कहीं से नहीं हटा पाया। परिणाम यह है, करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए हॉकर्स जोन खाली पड़े हैं और कारोबार सड़कों पर हो रहा है। समाचार पत्रों में अतिक्रमणों की खबरें जब प्रकाशित होती हैं तो अतिक्रमण अमला सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करता है। लेकिन उसके बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। आज हालत यह है कि फिर से सड़कों पर ठेले लग गए, जिन्हें मदाखलत अमला रोज अनदेखा कर निकल जाता है। शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए ठेले और फुटपाथी दुकानदारों के लिए नगर निगम ने शहर के 15 से अधिक स्थानों पर हॉकर्स जोन बनाए हैं। लेकिन करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और निगम के मैदानी अमले व पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के चलते यह व्यवस्था तमाम कोशिशों के बाद भी लगभग दम तोड़ चुकी है।

सड़क पर ही हो रहा है पूरा कारोबार

शहर के शिंदे की छावनी स्थित शान-ओ-शौकत से लेकर फूलबाग गुरुद्वारा तक 12 मीटर चौड़ी सड़क पर दो पहिया वाहनों को ठीक करने की एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं। दुकानदार तीन से चार मीटर सड़क घेरकर गाड़ियों की मरम्मत करते हैं। सड़क की चौड़ाई कम होने से वन-वे किया गया है। वहीं, दुकानों के बाहर दो पहिया वाहन खड़े होने से यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है। गाड़ियां हटाने के लिए निगम व सीएम हेल्प लाइन में शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

10 फीट बढ़ा रखी हैं दुकानें

ऊंट पुल के पास जिंसी रोड से लेकर छप्पर वाला पुल तक 18 मीटर डबल रोड पर कूलर, मोटर पार्ट्स व घास विक्रेताओं की दुकानें हैं। उसके बाद छप्परवाला पुल के पास घास बेचने वालों और मैकेनिकों ने रोड पर चार से छह मीटर तक कब्जा कर रखा है। यहां जाम की स्थिति बनी ही रहती है।

पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से खड़े होते हैं ठेले

आज से दो वर्ष पूर्व सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ट्रैफिक की रफ्तार में बाधक बन रहे हाथ ठेलों को हटाने के लिए रणनीति बनी थी। मदाखलत अमले ने अभियान चलाया था। शिंदे की छावनी क्षेत्र में मदाखलत की कार्रवाई का ठेला चालकों ने विरोध किया था। इसके बाद निगम अधिकारियों ने पुलिस बल की मांग की थी। लेकिन निगम अमले को पुलिस प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पाता है।

कई बार पिटते-पिटते बचे हैं मदाखलत कर्मचारी

शहर के ह्दय स्थल महाराज बाड़े पर जब भी मदाखलत अमला अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने पहुंचा है तो वहां मौजूद फुटपाथी दुकानदार मदाखलत के कर्मचारियों को घेरकर मारपीट पर उतारू हो जाते हंै। जिसके चलते कई बार मदाखलत अमला अपनी जान बचाकर भागे हैं।

केन्द्रीय मंत्री को दिखाने के लिए बाजार से हटाए थे ठेले

बीते कुछ दिनों पहले जब मुरार रामलीला मैदान में श्रीराम कथा आयोजित की गई थी तो नगर निगम के अधिकारियों ने केन्द्रीय मंत्री को दिखाने के लिए मुरार के सदर बाजार में लगने वाले सभी ठेले वालों को हॉकर्स जोन में पहुंचा दिया था। लेकिन उसके बाद आज हालत यह है कि मुरार सदर बाजार में बीच सड़कों पर सब्जी व फलों के ठेले नजर आ रहे हैं। जिसके चलते राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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