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थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा - के.एम.करियप्पा को भारत रत्न मिले या नहीं, अन्तिम फैसला सरकार का

थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा - के.एम.करियप्पा को भारत रत्न मिले या नहीं, अन्तिम फैसला सरकार का

वाराणसी। थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार तड़के काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में पत्नि मधुलिका रावत के साथ हाजिरी लगायी। बाबा विश्वनाथ के दरबार में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सेना प्रमुख ने षोडशोपचार विधि से पूजन अर्चन कर देश में शान्ति और सीमा पर तैनात जवानों के कुशलता के लिए अर्जी लगायी। बाबा के दरबार में सेना प्रमुख बेहद शान्त और आध्यात्मिक भाव भंगिमा में दिखे। मंदिर से चलते समय मंदिर प्रबन्धन से जुड़े अफसरों के साथ प्रधान अर्चक ने उन्हें बाबा का प्रसाद देने के साथ आर्शिवाद स्वरूप अंगवस्त्रम प्रदान ​किया।

वे 9 गोरखा राइफल्स के 200 वें स्थापना दिवस समारोह पर कैंटोंमेंट क्षेत्र स्थित 39 जीटीसी में आयोजित दो दिवसीय समारोह में भाग लेने आये हैं। वे सेना प्रमुख ज्ञानवापी क्रासिंग पर मीडिया से रूबरू हुए। बताया कि दर्शन पूजन के दौरान बाबा विश्वनाथ से सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान एक सवाल के जबाब में कहा कि देश की सेना के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। हमें अपने हथियारों की तकनीक को बदलते वक्त के साथ बेहतर करते रहना होगा और सेना को इस नई तकनीक से लैस करना होगा। जिससे हम दुश्मनों से लोहा ले सकें।

उन्होंने कहा कि आज की तारीख में सेना हर तरह से जवाब देने के लिए तैयार है और किसी भी तरह के हमले से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा को भारत रत्न दिए जाने के सवाल पर जनरल रावत ने कहा कि अंतिम फैसला सरकार ही लेगी और जो भी फैसला लिया जाएगा वह स्वीकार होगा। एक अन्य सवाल पर कहा कि जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

इसके पूर्व सेना प्रमुख ने गोरखा ट्रेनिंग सेन्टर स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर गोरखा शहीदों को नमन किया। उनके अलावा कर्नल ऑफ द रेजिमेंट (39 गोरखा) लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और मेजर जनरल डी.ए.चतुर्वेदी ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। इसके पूर्व गुरूवार को सेना प्रमुख गोरखा ट्रेनिग सेन्टर के स्थापना दिवस में शामिल हुए। समारोह में 1971 के युद्ध में शहीद जवान पूर्ण बहादुर की पत्नी सुमित्रा क्षेत्री समेत 18 शहीदों की पत्नियों को 'वीर नारी' सम्मान से नवाजा गया। यहां अपने सम्बोधन के दौरान सेना प्रमुख ने कहा कि सबसे पहले मैं आपको 200 वर्ष पूरा होने पर बधाई देता हूं। भारतीय सेना में शुरू से गोरखाओं ने खून-पसीना बहाया है। इनकी वीरता से पूरी दुनिया परिचित है। देश की सुरक्षा को भेदने वालों को नष्ट करने में गोरखाओं को महारत हासिल है।

इस खास मौके पर सेना प्रमुख ने जवानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखा। साथ ही उनके सा 'बड़ा खाना' में शामिल हुए। समारोह में ही सेना प्रमुख ने फर्स्ट डे कवर (डाक टिकट जारी करने के दिन की मुहर का लिफाफा) और सैनिक सम्मान पुस्तक का विमोचन भी किया।

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