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अगले साल से त्रिभाषा फॉर्मूले से बाहर होंगी विदेशी भाषाएं

अगले साल से त्रिभाषा फॉर्मूले    से बाहर होंगी विदेशी भाषाएं


नई दिल्ली।
अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में जर्मन और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं त्रिभाषा फॉर्मूले का हिस्सा नहीं होंगी। माना जा रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा है कि जो विद्यार्थी विदेशी भाषाएं सीखने के इच्छुक हैं उन्हें वैकल्पिक विषय के रूप में चौथी भाषा का चयन करना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाएं ही त्रिभाषा फॉमूर्ले के तहत सिखाई जानी चाहिए। इस संबंध में सीबीएसई के साथ विचार-विमर्श जारी है और अगले शैक्षणिक सत्र से बदलावों को लागू किए जाने की संभावना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, त्रिभाषा फॉर्मूले का आशय है कि हिंदीभाषी राज्यों में विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा एक आधुनिक भारतीय भाषा सीखनी चाहिए। जबकि गैर-हिंदीभाषी राज्यों में उन्हें स्थानीय भाषा और अंग्रेजी के अलावा हिंदी भी सीखनी चाहिए। हालांकि, 18 हजार से संबद्ध संस्थानों में से ज्यादातर आठवीं तक मातृभाषा या हिंदी, अंग्रेजी और एक विदेशी भाषा सिखाते हैं। दरअसल, पिछले साल दिसंबर में सीबीएसई ने माध्यमिक शिक्षा के लिए प्रस्तावित त्रिभाषा फॉमूर्ला मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि नई योजना को कब से लागू किया जाएगा। इस प्रस्ताव और सीबीएसई के वर्तमान त्रिभाषा फॉर्मूले में दो बड़े अंतर हैं। पहला, नई योजना आठवीं की बजाय दसवीं तक लागू होगी। दूसरा, इसमें विदेशी भाषा सम्मिलित नहीं होगी।

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