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तानाशाह को सबक सिखाने अमेरिका ने भेजे हथियार

तानाशाह को सबक सिखाने अमेरिका ने भेजे हथियार


वाशिंगटन।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। जहां अमेरिका अब तक कई बार उत्तर कोरिया को तबाह करने की चेतावनी दे चुका है, वहीं तानाशाह भी लगातार मिसाइल परीक्षण करके दुनिया के सबसे ताकतवर देश को ठेंगा दिखाता आ रहा है। कुछ समय पहले ही उत्तर कोरिया ने अपना सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन बम परीक्षण किया था, जिसके बाद अमेरिका ने अपने शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन को उत्तर कोरिया की निगरानी के लिए भेज दिया था। हाल ही में यूएसएस रूसावेल्ट और अब यूएसएस निमिट्ज को भेजकर अमेरिका लगातार कोरियाई प्रायद्वीप पर अपनी मौजूदगी बढ़ाता जा रहा है। बता दें, यूएसएस निमिट्ज इससे पहले आईएसआईएस के खिलाफ जंग के लिए मिडल-ईस्ट में तैनात था। एयरक्राफ्ट कैरियर को दुश्मन के हमले से बचाने में एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम बेहद जरूरी हथियार है। तीनों अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स में हाई ग्रेड फैलेंक्स क्लोज-इन वेपन सिस्टम इंस्टाल किया गया है।

हालांकि, फैलेंक्स सिर्फ उस समय यूज किया जाता है जब बाकी सारे मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन के सामने फेल हो जाते हैं।फैलेंक्स की एक खास बात ये भी है कि इससे सिर्फ बेहद करीब आ चुकी मिसाइल्स को ही बर्बाद किया जा सकता है। आमतौर पर इस सिस्टम से कैरियर की भारी तबाही रोकी जा सकती है।

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स

आमतौर पर ड्रिल या युद्ध के लिए भेजे जाने वाले कैरियर्स के साथ करीब 6 से 10 डेस्ट्रायर शिप्स भेजे जाते हैं। युद्ध के समय जहां, एयरक्राफ्ट कैरियर हमले के काम आते हैं। वहीं, आसपास खड़े डेस्ट्रॉयर कैरियर का बचाव करते हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर्स के साथ सफर करने वाले इन ग्रुप्स को कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी कहा जाता है। प्रशांत महासागर में भेजे गए तीनों ही एयरक्राफ्ट कैरियर्स यूएसएस रीगन, यूएसएस रूसावेल्ट और यूएसएस निमिट्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ हैं। युद्ध के समय जहां, एयरक्राफ्ट कैरियर हमले के काम आते हैं। वहीं, आसपास खड़े डेस्ट्रॉयर कैरियर का बचाव करते हैं।

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