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हिमाचल विधानसभा चुनाव : हैट्रिक मारने वाले 13 विधायक उतरे चुनाव मैदान में

हिमाचल विधानसभा चुनाव : हैट्रिक मारने वाले 13 विधायक उतरे चुनाव मैदान में

शिमला। हिमाचल में सत्तारुढ़ कांग्रेस एवं विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के 13 उम्मीदवार चुनावी चौका मारने के लिए चुनाव मैदान में हैं। रोचक बात यह भी है कि इनमें से चार नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने क्षेत्र बदलने के बाद भी हार का मुंह नहीं देखा है। राज्य की विधानसभा में आसीन होना हर किसी के वश की बात नहीं होती। कुछ नेता तो ताजिंदगी राजनीति करते हैं, मगर प्रदेश के तमाम नेता ऐसे हैं, जिन्होंने जीत का ऐसा क्रम बनाया जो टूटने का नाम नहीं ले रहा है।

बात भाजपा व कांग्रेस के दो दिग्गजों प्रेम कुमार धूमल और वीरभद्र सिंह से करते हैं। वीरभद्र सिंह वर्ष 1990 से लगातार छह चुनाव जीत चुके हैं। साल 2012 में उन्होंने अपना निर्वाचन क्षेत्र बदलकर शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ा था और 20 हजार मतों से विजयी रहे। इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने पहला विधानसभा चुनाव साल 1998 में बम्सन्न से लड़ा था। इस हल्के से वह लगातार तीन चुनाव जीते हैं।

डीलिमिटेशन के कारण साल 2012 में बम्सन्न हल्का खत्म होने के कारण धूमल ने हमीरपुर हल्के की ओर रुख किया और साढ़े आठ हजार मतों से जीत दर्ज कर चौथी मर्तबा विधानसभा पहुंचे। पिछले चुनाव में डीलिमिटेशन के चलते भाजपा के रविंद्र रवि और राजिव बिंदल के हल्के भी बदल गए थे। इस कारण रवि ने देहरा और बिंदल ने नाहन हल्के से किस्मत आजमाई और जीत हासिल की। भाजपा के रविंद्र रवि लगातार पांच और राजीव बिंदल लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं।

जीत की हैट्रिक बनाने वाले अन्य विधायकों में कांग्रेस के सुधीर शर्मा, मुकेश अग्निहोत्री, जीएस बाली, कौल सिंह और राकेश कालिया शामिल हैं। भाजपा से जय राम ठाकुर, सतपाल सत्ती, वीरेंद्र कंवर और महेंद्र सिंह हैं। जयराम ठाकुर साल 1993 से अब तक लगातार पांच चुनाव जीत चुके हैं।

हिमाचल की 68 विधानसभा सीटों पर नौ नवम्बर को मतदान होगा। सत्ताधारी कांग्रेस वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। वह कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में पिछले लगातार चार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली भाजपा ने इस बार अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहरे पर भाजपा चुनाव लड़ रही है। प्रेम कुमार धूमल दो बार साल 1998 से 2003 और साल 2007 से 2012 तक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

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