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हिन्दू विरोधी घृणित सेक्युलर साजिश

एक ओर रोहिंग्या मुस्लिमों को सुविधा देकर बसाने की मांग कथित सेकूलर कर रहे हैं। यह मांग उसी तरह की है, जिस तरह राष्ट्र को खतरे में डालकर वोट के स्वार्थ के लिए ये सेकूलर हिन्दू विरोधी तुष्टिकरण नीति में अपने वोट बटोरते रहे हैं। यही सेकूलर नेतृत्व जिसमें कांग्रेस, कम्युनिस्ट और अन्य दलों के छोटे-बड़े नेता है। अब रोहिंग्या मुस्लिमों की पैरवी में खड़े दिखाई दे रहे हैं, उन्हें इस सच्चाई से कोई सरोकार नहीं है कि रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार (ब्रह्मा) से क्यों भगाए गए, वे इस सच्चाई से अवगत नहीं होना चाहते कि इन्होंने रखाइन प्रांत की हिन्दुओं की बस्ती का सफाया क्यों किया। हिन्दुओं के खून से रंगे हाथों को लेकर ये भागकर क्यों आए? हिन्दुओं की बस्ती में हिन्दू महिलाओं की टूटी-फूटी चूड़ियां मिली है, सुहाग का सिंदुर बिखरा पड़ा है। इन हिन्दू महिलाओं के अपहरण, बलात्कार की चित्कार वहां सुनाई देती है। जिन्दा गाड़ दिए या मार के दफन किए गए करीब पचास हिन्दुओं को वहां दफन किया गया। इस बर्बरता की सच्चाई ये सेकूलर जानना नहीं चाहते। इनके लिए देश से बड़ा वोट है। यही हिन्दू एवं राष्ट्र विरोधी सेकूलर नीति का सिलसिला आजादी के बाद से ही चल रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 को नागपुर में हुई। आज केवल संघ का संगठन दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन है, बल्कि हर देशभक्त के विचारों में संघ के विचारों का मंथन चलता है। संघ का चिंतन हमेशा राष्ट्र चिंतन रहा है, इसीलिए देश की एकता-अखंडता और सुरक्षा के बारे में संघ हमेशा सच्चाई व्यक्त करता रहा है, चाहे यह सच्चाई किसी को राजनीतिक दृष्टि से चुभने वाली हो सकती है। संघ के 92वें स्थापना दिवस पर सरसंघचालक मान. मोहनजी भागवत ने कहा कि हमें यह सच्चाई जानना होगी की रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से क्यों भगाए जा रहे हैं? इन रोहिंग्यों के कारण बेरोजगारी की समस्या बढ़ेगी और देश की सुरक्षा की समस्या पैदा होगी। बांग्लादेश के घुसपैठियों की समस्या है। इस बारे में उल्लेख करना होगा कि करीब चालीस हजार रोहिंग्या भागकर भारत के जम्मू और अन्य क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। इनके अलकायदा आईएस जैसे आतंकी संगठनों से संबंध है। इसलिए कोई भी भारत हित के बारे में विचार करने वाला व्यक्ति यही कहेगा कि रोहिंग्याओं को शरण देकर नई समस्या पैदा नहीं करना चाहिए। यह भी उल्लेख करना होगा कि म्यांमार सरकार उन्हें अपना नागरिक क्यों नहीं मानती, इन्हें बांग्लादेशी मानती है। भारत सबसे अधिक सुरक्षा खतरों से घिरा हुआ है। आतंकवादी संगठन सक्रिय है, अलगाववादी देश की अखंडता के खिलाफ साजिश करते हैं। पाकिस्तान को समझाने के बाद भी दुश्मनी का व्यवहार कर रहा है। इन खतरों को कम करने की बजाय नया रोहिंग्या खतरा भारत के हित में नहीं है। जब भी हुर्रियत जैसे अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कार्यवाही होती या अस्थाई धारा 370 को समाप्त करने की बात होती है तो अलगाववादियों के साथ सेकूलर नेतृत्व भी इनकी आवाज के साथ आवाज बुलंद करने लगता है। चाहे सेकूलर शब्द को दुनिया में सकारात्मक दृष्टि से समझा जाए, लेिकन भारत में इस सेकूलर शब्द को इतना भ्रष्ट कर दिया है कि इसका व्यवहारिक आशय हिन्दू विरोधी, संस्कृति विरोधी और देश की एकता-अखंडता और सुरक्षा के विरोध के लिए उपयोग में लाया जाता है। सेकूलर नीति का आधार केवल वोट के लिए हिन्दू विरोधी मुस्लिम तुष्टिकरण रहा है। चूंकि मुस्लिम, कट्टरपंथी ऐसे मुल्ला-मौलवी, मुफ्ती और इमामों के कब्जे में हैं या इनके फतवों के अनुरूप चलने को बाध्य है, जिनको भारत की हिन्दू विरोधी, संस्कृति और राज्य की एकता-अखंडता को कमजोर करने वाली बातों से संतुष्टि मिलती है। इसी नीति को हवा देने का काम सेकूलर नेतृत्व करता रहा है, मुस्लिम वोटों पर काबिज होने के लिए देश विरोधी सेकूलर नीति का प्रयोग 1947 में किया गया, मुस्लिमों को संतुष्ट करने के लिए तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने देश का खूनी विभाजन स्वीकार किया। मजहबी आधार पर बना पाकिस्तान भारत का स्थाई दुश्मन बन गया, आतंकवाद, कश्मीर समस्या के जड़ से पाकिस्तान है। यह बहस का अलग सवाल है कि जिन मुस्लिम कट्टरपंथियों को सेकूलर नेतृत्व ने संतुष्ट किया, इनके कारण मुस्लिमों की और दुर्दशा हुई।

यह मुस्लिमों का दुर्भाग्य है कि वे समय के साथ कदम नहीं बढ़ा पा रहे हैं। आज भी मुल्ला-मौलवी तीन तलाक को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक, गैर कानूनी करार देने के बाद भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है। चाहे बहुसंख्यक हिन्दू समाज की अटूट श्रद्धा से जुड़ा रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का सवाल हो, चाहे गौरक्षा का मामला हो, इनको कांग्रेस, कम्युनिस्ट आदि सेकूलर उन लोगों के साथ खड़ा दिखाई देता है, जो हिन्दू भावना को आहत करना चाहता है। इससे अधिक घटिया राजनीति और क्या होगी कि कांग्रेस शहजादे राहुल गांधी जेएनयू में जाकर देश विरोधी नारे लगाने वाले और कश्मीर की आजादी की मांग करने वालों के समर्थन में जाकर खड़े हो जाते हैं। सेकूलर राजनीति के पतन की पराकाष्ठा और क्या हो सकती है, हिन्दू को लांछित करने की इस घृणित साजिश से पता चल सकता है। हिन्दू आतंकवाद का शब्द दिग्विजयसिंह, तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे, चिदम्बरम जैसे नेताओं ने गढ़ा। हिन्दू संगठनों को बदनाम करने और हिन्दुत्व के प्रवाह को रोकने की यह साजिश की गई। 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट में झूठे आरोप लगाकर कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा भारती, स्वामी असीमानंद और मेजर रमेश उपाध्याय को फंसाया गया। उन पर लगातार नौ वर्ष तक जेल से थर्ड डिग्री टार्चर किया गया। साध्वी प्रज्ञा के साथ बर्बर अत्याचार किए गए, उनके साथ शर्मसार करने की हरकतें की गई। एटीएस के प्रमुख अधिकारी ने उनको मारा-पीटा, यहाँ तक की उन्हें करंट लगाए गए, केवल यह उगलवाने के लिए कि मालेगांव विस्फोट में भागीदारी करना स्वीकार कर ले। टार्चर के कारण कई बार साध्वी प्रज्ञा अचेत हो गई। लेकिन उन्होंने बर्बरता को बर्दाश्त करने के बाद भी झूठ को स्वीकार नहीं किया। इसी प्रकार कर्नल पुरोहित के साथ भी जेल में थर्ड डिग्री टार्चर करने के साथ उन पर नौ वर्षों तक लगातार अत्याचार किए गए, लेकिन उन्होंने झूठ का साथ देना स्वीकार नहीं किया। इसी बर्बरता के शिकार हुए मेजर रमेश उपाध्याय, जमानत से छूटने के बाद उन्होंने बताया कि उनको जेल में नंगा कर पीटा गया, उनकी छाती पर खड़े होकर जूतों से रौंदते रहे। बिजली का शॉक लगाकर टार्चर किया गया। यहाँ तक कहा गया कि मालेगांव विस्फोट के अपराध को स्वीकार नहीं किया तो तुम्हारी जवान बेटी को उठाकर यहाँ लाएंगे और उसके साथ तुम्हारे सामने बलात्कार करेंगे। तुम्हारी पत्नी को उठाकर लाएंगे और तुम्हारे सामने नंगा करेंगे। यह सब शर्मसार करने वाली बर्बरता की गई हिन्दू आतंकवाद की झूठ को सच प्रमाणित करने के लिए। यही नहीं हिन्दू आतंकवाद की झूठ की पैरवी करने में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने अमेरिकी राजदूत के सामने कहा कि हिन्दू आतंकवाद का भी खतरा है। हिन्दू को लांछित करने के लिए सेकूलर नेतृत्व कितनी घृणित साजिश कर सकता है, इसका ताजा प्रमाण है मालेगांव विस्फोट के माध्यम से की गई हिन्दू विरोधी साजिश। भारतीय राजनीति को वैचारिक दृष्टि से दो भागों में बाँट सकते हैं। एक ओर ऐसा सेकूलर नेतृत्व है, जिनका सरोकार केवल वोटों से है। इनके विचारों में न राष्ट्रहित है और न जनहित है। केवल है वोट हित। दूसरी ओर है राष्ट्रभाव से प्रेरित नेतृत्व जो देश को ऊँचाई पर ले जाने के संकल्प को पूरा करने में जुटा हुआ है। झूठ हमेशा पराजित हुआ है, हिन्दू को लांछित करने वाली साजिश की सच्चाई भी सामने आ गई है। हिन्दुत्व ही भारत की प्राण वायु है, इसको जो आहत करेगा, वह स्वयं मिट जाएगा।


(लेखक - वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक)

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