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भाई और बहन के बीच के प्यार का विशेष त्योहार

भाई और बहन के बीच के प्यार का विशेष त्योहार

स्वदेश वेब डेस्क। भाई दूज, भाई और बहन के बीच के प्यार का त्योहार है। यह त्योहार पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस पंच पर्व महोत्सव दीवाली का पांचवां पर्व भैया दूज है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है तथा देश भर में इसे बड़े सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर केसर का तिलक लगाती हैं तथा उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं। यह पर्व दीवाली से दो दिन बाद यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है जो इस बार 21 नवम्बर को है।

हम आपको बता दें कि रक्षाबंधन के बाद भाई-बहन का यह दूसरा त्यौहार होता है। हिन्दू धर्म के मुताबिक यह त्यौहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। जहां एक ओर पूरे जीवन भर भाई-बहन के इस रिश्ते में खींच-तान देखी जाती है तो वहीं जब बात त्यौहार की आती है तो तब दोनोे के बीच इस अमूल्य रिश्तो में प्यार भी देखने को मिलता है। इस त्यौहार पर विवाहित बहनें अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित करती है और गोबर से भाई दूज परिवार का निर्माण करती है। अपने भाई को भोजन कराती है। बहन अपने भाई को तिलक लगाकर, उपहार देकर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार, कार्तिक मास का महीना है तथा इस दिन किए गए स्नान, दान एवं पुण्य कर्मों का फल कई गुणा अधिक है परंतु भैया दूज को यमुना नदी में स्नान करने का बड़ा महत्व है। बहने पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात मार्कण्डेय, बली, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम जी आदि आठ चिरंजीवियों का विधिपूर्वक पूजन करें, बाद में भार्इ के माथे पर तिलक लगाते हुए सूर्य , चन्द्रमा, पृथ्वी तथा सभी देवताओं से अपने भार्इ के परिवार की सुख समृद्धी के लिए प्रार्थना करें। भार्इ का मुंह मीठा करवाएं। भार्इ अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें।

भाई दूज तिलक का शुभ मुहूर्त-
सुबह 07.50 से 09.20 तक
दोपहर 12.05 से 01:35 तक
दोपहर 01:35 से 02:55 तक
दोपहर 02:55 से 04.20 तक
शाम 05.40 से 07.05 तक

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