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लायसेंसी शस्त्र नहीं है तो नौकरी छोड़ो

*उप्र के चुनाव से ग्वालियर जिले के शस्त्र लायसेंस धारकों की मुश्किल

*अधर में लटकी नौकरी

राजेश शुक्ला/ग्वालियर| उप्र में विधानसभा चुनाव की सबसे ज्यादा मुश्किल उन नौकरीपेशा लोगों को उठानी पड़ रही है जो मूलरूप से इस प्रदेश के नहीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण आपको बता दें कि ग्वालियर जिले के पांच सैंकड़ा से ज्यादा शस्त्र लायसेंसधारी हैं जो उप्र के आगरा, नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में विभिन्न निजी और सरकारी कम्पनियों में सुरक्षा गाडर््स की नौकरी कर रहे हैं। इन सभी धारकों को चुनाव आयोग से मिले निर्देश के बाद अपने शस्त्र मूल स्थान पर छोड़ने की बात कही जा रही है, लेकिन उलझन यह है कि उप्र में चुनाव आयोग की इतनी ज्यादा सख्ती है कि कई बड़ी कम्पनियों के अधिकारियों ने सशस्त्र सुरक्षा कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर शस्त्र नहीं हंै तो कम्पनी की सुरक्षा कैसे होगी , इसलिए आप नौकरी छोड़ दो। इस फरमान के बाद सुरक्षा कर्मचारियों की मुश्किल बढ़ती जा रही है।

चुनाव के कारण नौकरी खतरे में
उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने से चुनाव आयोग ने लायसेंसी शस्त्र धारकों को अपने हथियार थानों में जमा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जमा न करने पर उन्हें निलंबित करने की चेतावनी दी है, लेकिन ग्वालियर जिले के बड़ी संख्या में उप्र के शहरों में सशस्त्र सुरक्षा गार्डों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। उप्र के आगरा, नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में विभिन्न निजी कम्पनियों में तैनात सुरक्षा गार्डों को संबंधित थाना पुलिस लायसेंसी शस्त्रों को अपने मूल स्थान पर ले जाने की बात कर रहे हैं।

हथियार नहीं तो नौकरी का क्या मतलब?: इधर उप्र के कई शहरों में विभिन्न कम्पनियों ने अपने विभाग के ऐसे सुरक्षा कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि आपके पास शस्त्र नहीं हैं तो आप लिखकर दें कि हमारे पास सुरक्षा के लिहाज से शस्त्र नहीं हैं इस कारण हम नौकरी नहीं कर सकते। इसके बाद शहर के शस्त्र धारक जो इतनी दूर रहकर नौकरी कर अपने परिवार का जीवन-यापन कर रहे हैं उन पर संकट आ गया है।

प्रशासनिक अधिकारी दे सकते हैं अनुमति!
बताया जाता है कि अगर कोई अन्य प्रदेश का शस्त्र लायसेंसधारी है और वह यहां रहकर सुरक्षा कर्मचारी की नौकरी कर रहा है तो वह उक्त शहर के संबंधित डीएम या प्रशासनिक अधिकारी से शस्त्र लायसेंस रखने की अनुमति ले सकता है। ग्वालियर जिला प्रशासन के शस्त्र विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उक्त व्यक्ति एक आवेदन दे सकता है। इस आवेदन को पुलिस अधीक्षक कार्यालय से उसके रहने के स्थान को सत्यापित कर इसकी रिपोर्ट प्रशासन को देकर अनुमति देने की अनुशंसा कर सकता है।

नौकरी पर संकट आ गया
आगरा के सदर बाजार में एक जूता फैक्ट्री में 315 बोर रायफल के साथ सुरक्षा अधिकारी की दस सालों से नौकरी कर रहे मुरार निवासी श्याम सिंह चौहान पुत्र केशव सिंह चौहान ने बताया कि उप्र में चुनाव होने के कारण उनकी नौकरी पर संकट आ गया है। फैक्ट्री संचालक ने स्पष्ट कहा है कि अगर शस्त्र नहीं है तो लिखकर दो कि नौकरी करने में असमर्थ हो। अब क्या करें,कैसे गुजारा करेंगे।

‘‘उप्र में विधानसभा चुनाव हैं, ग्वालियर जिले के शस्त्रधारी वहां नौकरी कर रहे हैं तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। मामला चुनाव आयोग के निर्देश का है।’’

शिवराज वर्मा
एडीएम

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