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कलयुग के लिए ही बना है सत्यनारायण व्रत

कलयुग के लिए ही बना है सत्यनारायण व्रत


इस व्रत को करने का कोई भी दिन निर्धारित नहीं है इस लिए सत्यनारायण की पूजा आप चैत्र (मार्च-अप्रैल), वैशाख (अप्रैल-मई), श्रावण (जुलाई-अगस्त) और कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) के महीने में की जा सकती है।


एक बार नारद मुनि पृथ्वी पर भ्रमण करने आये तब उन्होंने मनुष्य को दुःख और परेशानी से घिरा हुआ देखा। वे यह सब देख कर बहुत दुखी हुए और भगवान विष्णु के पास गए। नारद मुनि ने भगवान विष्णु से प्रार्थना कि वे मनुष्यों के दुखों को समाप्त करने का कोई उयाये बताएं। भगवान विष्णु ने तब उन्हें सत्यनारायण की कथा सुनाई, जिसे मनुष्य के सारे दुःख समाप्त हो जाएंगे। इसके बाद जब नारद मुनि पृथ्वी पर वापस गए तो उन्होंने सत्य नारायण के व्रत के बारे में सब मनुष्यों को बताया। और यह भी कहा कि इसे श्रद्धापूर्वक करने से इसान की हर मनोकामना पूरी हो जायेगी। इसे करने का तरीका बहुत ही साधारण है।

इसे करने के लिए किसी पंडित की जरुरत नहीं पड़ती है यह कोई भी कर सकता है। फिर चाहे वह किसी भी जाती का हो। इस वर्त में सिर्फ भगवान विष्णु की पूजा होती है। इसे आप कही भी करा सकते हैं यह स्थान मंदिर या घर भी हो सकता है। यह व्रत कलयुग के लिए ही बना है, जिसमें आपको किसी भी वेद यह पुराणों को पढ़ने की जरुरत नहीं है।

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