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तिरुपति मंदिर के खजाने में 7 टन सोना, 30 टन चांदी

तिरुपति मंदिर के खजाने में 7 टन सोना, 30 टन चांदी

तिरुपति मंदिर के खजाने में 7 टन सोना, 30 टन चांदी

नई दिल्ली। चाहे त्योहारों के दौरान खरीददारी हो, शादी में उपहार के रूप में तोहफा देना हो या फिर धार्मिक उत्सवों में दान करना हो, भारतीय लोगों की पहली पसंद है। माना जाता है भारत में लोगों के घरों, कारोबार और मंदिरों के खजाने में करीब 20 हजार टन सोना जमा है।

इस कीमती धातु की वजह से देश का आयात बिल भी बढ़ता है। लोगों की सोने की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार उसका आयात करना पड़ता है। लेकिन लोगों के घरों और मंदिरों में पड़ा सोना अर्थव्यव्स्था में इस्तेमाल नहीं हो पाता। इसीलिए सरकार अब इस जमा सोने को अर्थव्यवस्था में वापस लाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। सरकार की योजना निजी तौर पर जमा सोने को निकालकर अर्थव्यवस्था में लाने की है और इसमें धनवान हिंदू मंदिर अहम भूमिका निभा सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में एक खरब डॉलर मूल्य का सोना लोगों के निजी लॉकरों में जमा है। तिरुमला तिरुपति मंदिर देश का सबसे अमीर मंदिर है जिसके पास सात टन सोना है और श्रद्धालु हर दिन इसमें इजाफा कर रहे हैं। श्रद्धालु मंदिर के दान पात्र में करोड़ों डॉलर की नकदी और जेवरात डालते हैं जिसमें सोना प्रमुखता से होता है।

तिरुपति ऐसा पहला मंदिर है जिसने सरकार की योजना में भागीदारी की है। मंदिर के न्यास तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने पंजाब नेशनल बैंक में करीब 1.3 टन सोना जमा किया है। स्टेट बैंक में निवेशित एक टन सोने को भी ट्रस्ट इसी मकसद से शिफ्ट करने जा रहा है। मंदिर न्यास ने करीब डेढ टन सोना इंडियन ओवरसीज बैंक में भी रखा है।

मंदिर के अधिकारियों के मुताबिक गोल्ड डिपॉजिट स्कीम (जीडीएस) के तहत साढ़े चार टन सोना जमा है जिससे ब्याज के रूप में मंदिर को हर साल अस्सी किलो सोने की कमाई होती है। मुंबई के श्री सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट ने भी कहा है कि वह करीब 45 किलो सोना इस योजना के तहत जमा करेगा। कई अन्य मंदिर भी इस योजना का लाभ उठाने की सोच रहे हैं।

तिरुपति मंदिर की कुल सालाना आय 2,600 करोड़ रुपये बताई जाती है। इसमें हुंडी से चढ़ावे के रूप में 1,000 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। इसके अलावा निवेश से 800 करोड़ रुपये और टिकट, प्रसाद आदि से 600 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। मंदिर को श्रद्धालुओं की ओर से कराए जाने वाले मुंडन से भी अच्छी खासी आय होती है। मोटे तौर पर मंदिर के मुंडन के बालों की नीलामी से हर साल 140 करोड़ मिलते हैं।

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