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डोपिंग से जुड़े सवाल

डोपिंग से जुड़े सवाल


राष्ट्रीय डोपिंग निरोधी एजेंसी (नाडा) के डोप टेस्ट में नाकाम हुए पहलवान नरसिंह यादव इन दिनों चर्चा में है। नाडा के कानूनी विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि पहलवान नरसिंह ऐसे पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाए कि उनके खाने में किसी ने प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया था। और वो ये ठोस दलील भी पेश नहीं पाए कि प्रतिबंधित दवाएं उनके शरीर में कैसे पहुंची। बहरहाल नरसिंह का रियो ओलम्पिक में जाना खटाई में पड़ गया और नाडा अपने फैसले में उन्हें दो से चार साल तक की सजा का भी ऐलान कर सकता है। भारत में डोपिंग का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई भारतीय खिलाड़ी डोप टेस्ट में पकड़े गए और उन पर प्रतिबंध लगाया गया। खेलों के इतिहास में डोपिंग कोई नई चीज नहीं है।

1904 के ओलंपिक खेलों में पहली बार खिलाडिय़ों द्वारा शक्तिवर्धक चीज के इस्तेमाल की बात सामने आई और इसका आरोप लगा मैराथन धावक थॉमस हिक पर। तब इन शक्तिवर्धक पदार्थों के इस्तेमाल पर कोई नियम-कानून नहीं बने थे। पहली बार 1928 में अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स संघ ने डोपिंग पर नियम बनाए और इन शक्तिवर्धक दवाओं के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया। डोप यानी वो शक्तिवर्धक पदार्थ या दवा जिसके इस्तेमाल से खिलाड़ी अपनी मूल शारीरिक क्षमता में इजाफा कर मैदान पर विरोधी को पछाडऩे का शार्टकट अपनाता है। ये तरीका खेल के मूल सिद्धांत के विपरीत है। इसीलिए इसे दुनिया के खेल नियामकों ने अवैध करार दिया है। डोपिंग के दोषियों को दो साल से लेकर आजीवन प्रतिबंध तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

पहलवान नरसिंह यादव के डोप टेस्ट में पकड़े जाने का मामला इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि भारत शुरू से खेल की मूल भावना की विरोधी गतिविधियों का विरोधी रहा है। डोपिंग विवाद में फंसे नरसिंह यादव की इस शर्मनाक हरकत के बाद उनका रियो का पत्ता तो कटा, कुश्ती में 74 किलोग्राम वर्ग में कोई भी भारतीय खिलाड़ी ओलम्पिक में नहीं जा पाएगा। यानि भारत की इस वर्ग में पदक जीतने की उम्मीद भी खत्म हो गई। खिलाड़ी अपने बचाव में जो कुछ भी कहें लेकिन यह उनकी ही जिम्मेदारी है कि प्रतिबंधित दवाओं से बचा जाए। नाडा की सूची में प्रतिबंधित दवाओं को समय-समय पर अद्यतन भी किया जाता है और इसकी जानकारी खिलाडिय़ों को भी दी जाती है। ऐसे में खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाओं से अनजान नहीं रह सकते। इस तरह की घटनाओं के सामने आने के बाद सरकार को अपनी खेल नीति में भी ऐसे उपाय करने होंगे जिससे प्रतिबंधित दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल पर रोक लग सके।

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