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हिन्दू समर्थन से बनेगा राममंदिर

हिन्दू समर्थन से बनेगा राममंदिर

मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन में जारी आस्था के महापर्व सिंहस्थ में प्रकृति के प्रकोप से आई आपदा पर हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था कहीं अधिक भारी दिखाई पड़ रही है। आंधी-तूफान और बारिश के कारण सिंहस्थ में हुई जनहानि भी लाखों-करोड़ों हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। परिणाम यह हुआ कि आपदा के भय से हिन्दू श्रद्धालु भयभीत नहीं हुआ और मौसम विभाग की निकट भविष्य में पुन: आंधी-तूफान की चेतावनी के बावजूद उज्जैन महाकुंभ में श्रद्धालुओं का आना जारी है। प्रदेश सरकार की व्यवस्थाओं की सराहना करनी होगी कि मौसम की मार के तुरंत बाद से ही सिंहस्थ को पटरी पर लाने के जिस तरह के अभूतपूर्व प्रयास हुए उसका परिणाम आपदा के अगले ही दिन से कुंभ में दिखाई पडऩे लगा।

धर्म और ईश्वर के प्रति ऐसी आगाध श्रद्धा सिर्फ हिन्दुस्तान में ही देखी जा सकती है। सिंहस्थ में आयोजित अखिल भारतीय संत सम्मेलन एवं धर्म संसद से एक और ऐसा समाचार मिला जिसके लिए हिन्दुस्तानी वर्षों से आस लगाए बैठे हैं। धर्म संसद ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तिथि तय कर दी है। धर्म संसद के अनुसार राम मंदिर निर्माण कार्य इसी वर्ष कार्तिक अक्षय नवमी 9 नवम्बर 2016 से आरंभ कर दिया जाएगा। राममंदिर निर्माण की शुरूआत रामलला परिसर में सिंहद्वार निर्माण से की जाएगी। धर्म संसद में मौजूद संतों-महंतों और रामभक्तों ने यह स्पष्ट भी किया कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण से केन्द्र की मोदी सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। अर्थात हिन्दू आस्था और आदर्श व्यक्तित्व के प्रेरणा स्रोत भगवान राम की जन्मस्थली पर से बाबर द्वारा नष्ट किए गए राममंदिर को पुन: स्थापित करने के लिए किसी सरकार की आवश्यकता नहीं है बल्कि यह काम हिन्दू स्वयं करेगा।

धर्म संसद में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जन्मेजय शरण महाराज ने यह स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि जिसे विवादित कहा जाता है, वह 77 एकड़ भूमि निर्मोही अखाड़े की है। न्यायालय के आदेश के परिपालन में मंदिर निर्माण की बात भी उन्होंने कही। निश्चित ही राममंदिर निर्माण के धर्म संसद के इस फैसले पर अब राजनीति शुरू होगी। वोटों के लिए तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले कुछ राजनेता तरह-तरह की आवाज निकालकर सम्प्रदाय विशेष के शुभचिंतक बनने का ढोंग करेंगे। यह नेता भाजपा और संघ पर हमला करने का प्रयास भी करेंगे। निश्चित ही इसे भारतीय लोकतंत्र की विडंबना ही कहा जाएगा कि संविधान में सभी धर्मों को समान अधिकार और सम्मान देने वाले हिन्दुस्तानियों के अपने हिन्दू धर्म को यहां सबसे अधिक अपमान और उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। किसी मस्जिद या चर्च के निर्माण के लिए आगे बढ़कर समर्थन करने वाले तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू नेता हिन्दुस्तान में राम मंदिर के निर्माण को अपराध की संज्ञा देने लगते हैं। ऐसे नेताओं का न तो कोई धर्म होता है और न यह मानवता के प्रति आस्थावान होते हैं। इनकी आस्था सिर्फ स्वयं के राजनीतिक और आर्थिक हितों से जुड़ी रहती हैं। हिन्दू बाहुल्य देश में यह राजनेता सिर्फ इसलिए ऐसा कर पाते हैं क्योंकि हिन्दुस्तान में विदेशी आक्रांताओं और ब्रिटिश शासकों द्वारा जाति आधारित एक बड़ी खाई तैयार कर दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के बाद से ही इस खाई को पाटने के लिए प्रयास करता रहा है। वहीं केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इस जाति-भेद की खाई को पाटने के अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं।

कांग्रेसी सरकारों में भारतीय शिक्षण विषयों से हिन्दुस्तान से जुड़े इतिहास, परंपराओं, संस्कार और संस्कृति को जिस तरह से गायब किया गया। पश्चिमी संस्कृति को प्रभावी रूप में और हिन्दुस्तानी संस्कृति को विकृत रूप में पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया निश्चित ही उससे हिन्दुस्तान की तीन-चार पीढिय़ां अत्यधिक प्रभावित हुई हैं। यही कारण है कि हिन्दुओं और हिन्दू धर्म को सरेआम गालियां देकर अन्य धर्मों की वकालत करने वाले राजनेता हिन्दुस्तान में चुनाव जीतते रहे हैं। ऐसे में हिन्दू को अपनी सोई हुई आस्था को जगाना होगा। अपनी संस्कृति और संस्कारों को पुन: धारण करना होगा। यह संस्कृति और संस्कार हमारे महापुरुषों, वीरों की गाथाओं, आस्था केन्द्रों से प्रेरणा लेकर हमारी पीढिय़ों में समाएंगे। ऐसे में हर हिन्दू को स्वयं खड़ा होना होगा और राममंदिर निर्माण ही नहीं हिन्दू आस्था से खिलवाड़ के प्रति हर स्तर पर जागरुक होकर उसका उचित रूप से प्रतिकार करना होगा। तभी हिन्दू धर्म और हिन्दुस्तान पुन: विश्व में स्थापित होगा अैर विश्व गुरू के अपने पद को पुन: प्राप्त कर सकेगा।

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