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लोकतंत्र को खतरा है घोटालेबाजों से?

लोकतंत्र को खतरा है घोटालेबाजों से?

जयकृष्ण गौड़

जिस तरह राजीव गांधी की सरकार के लिए बोफोर्स तोपों की खरीदी में दलाली खाने में शंका की सुई राजीव-सोनिया परिवार तक पहुंची। इस मुद्दे पर सुरक्षा मंत्री रहे वी.पी. सिंह ने विद्रोह कर दिया। यह मुद्दा राजीव सरकार के पतन का कारण बना। अब इटली की कोर्ट ने जो निर्णय दिया है उसमें जिन नेताओं और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का नाम 363 करोड़ की रिश्वत लेने में आया है। उल्लेख करना होगा कि इटली की कंपनी फिनमेकानिक से वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए सन् 2010 में 3600 करोड़ का सौदा हुआ। इसमें तीन वी.वी.आई.पी. हेलीकॉप्टर की आपूर्ति की जा चुकी थी। इस मामले में इटली की कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस सौदे में रिश्वत भारतीय नेताओं को दी गई। अब सवाल है कि यह फैसला किसी भारतीय कोर्ट का नहीं वरन् कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जन्मभूमि इटली की कोर्ट का है। इससे कांग्रेस बुरी तरह तिलमिला गई है। अपने रिश्वत लेने वाले नेताओं के बचाव में दिल्ली में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में मार्च निकाला। इसे लोकतंत्र बचाओ नाम दिया गया। सोनिया गांधी ने इस अवसर पर कहा 'आपको पता नहीं कि कांग्रेस किस मिट्टी की बनी हुई है।'

सोनिया गांधी के बचाव में कांग्रेस के युवा नेता सिंधिया ने सोनिया गांधी को शेरनी बताया। इस मामले में चेन्नई की रैली में चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि 'मैं जैसे ही घपला करने वालों का स्क्रू टाइट करता हूं, दिल्ली में लोग चूृ-चां करने लगते है, पर मैं किसी को छोड़ूंगा नहीं।' उन्होंने इसी रैली में कहा कि मेरा कोई रिश्तेदार इटली में नहीं और न आप लोगों का कोई रिश्तेदार इटली में होगा। इस हेलीकॉप्टर डील में रिश्वत देने का उल्लेख भी इटली की कोर्ट ने किया है। इसी मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने तीखा व्यंग्य करते हुए संसद में कहा कि 'मैंने किसी पर आरोप नहीं लगाया, किसी का नाम नहीं लिया, पर जो अरबी खाते है उनके गले में खुजली होने लगती है।Ó इन्हें (कांग्रेस) को पता है कि भ्रष्टाचार की गंगा बहकर कहां जाती है। हम इस बारे में पता लगाकर रहेंगे। इस बारे में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति अभियान के द्वारा एक रैली में कहा था कि-'भ्रष्टाचार की गंंगोत्री दिल्ली में है उनका निशाना तत्कालीन इंदिरा सरकार के मंत्रियों की ओर था। अपने घपले इटली कोर्ट के द्वारा उजागर करने के मामले में लोकतंत्र बचाओ की बात कहां से आई।'

जिस तरह इंदिराजी के समय कांग्रेस अध्यक्ष बरूआ ने कहा था कि इंदिरा इज इंडिया, उसी तरह कांग्रेसी शायद यह मानते है कि सोनिया इज लोकतंत्र। सोनियाजी की ओर आरोप लगे तो कांग्रेस का लोकतंत्र खतरे में आ गया। सोनियाजी की यह चुनौती भी भरोसा करने लायक नहीं कि आपको (मोदी को) पता नहीं कि कांग्रेस को अच्छी तरह जानते हैं। इसका जन्म कांग्रेस की कोख से हुआ और विदेशी मूल के हाथों में कांग्रेस की कमान है। सोनियाजी किस विदेशी मिट्टी में जन्मी है उस इटली को भी लोग जानने लगे है। चाहे सोनियाजी को कांग्रेसी लोकतंत्र का पर्याय मान लें, लेकिन सोनियाजी में उनके उन्हीं पूर्वजों के जीन है जो तानाशाह मुसोलिनी की फॉसिस्ट सेना में थे। लोकतंत्र चाहे इटली की माटी में हो या न हो, लेकिन भारत में लोकतंत्र यहां की संस्कृति, धर्म और सहिष्णुता में सदियों से है। भारत का लोकतंत्र इतना परिपक्व है कि उसे कोई डिगा नहीं सकता। अब तो कांग्रेस लोकतंत्र बचाओ की नौटंकी कर रही है। नरेन्द्र मोदी की सरकार को भारत की जनता का समर्थन प्राप्त है, जहां तक जनसंघ से लेकर भाजपा की यात्रा का सरोकार है उसकी राष्ट्रवादी अवधारणा में राष्ट्र सर्वोपरि है। उसके संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर की अलग पहचान की धारा 370 को समाप्त करने के लिए अपना बलिदान दे दिया। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने 'एकात्म मानव दर्शनÓ को प्रस्तुत किया, जो साम्यवाद और पूंजीवाद का सशक्त विकल्प है। कांग्रेस के शासनकाल को भी जनता जानती है। लोकतंत्र पर तगड़ा प्रहार तो कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने किया था। 1975 में देश के लोकतंत्र का गला घोंटकर आपातकाल लागू करने वाला कांग्रेस नेतृत्व ही था। वह था अपनी कुर्सी बचाने के लिए? लोकतंत्र में न व्यक्तिवादी नेतृत्व होता है और न परिवारवादी नेतृत्व प्रभावी हो सकता है। कांग्रेसियों की कठिनाई यह है कि वे यह मानते हैं कि सोनिया और राहुल के नेतृत्व के बिना उन्हें सत्ता सुख देने वाला कोई नहीं है, इसलिए वे परिवारवादी नेतृत्व के चंगुल से मुक्त नहीं हो सकते। हालांकि सोनिया-राहुल के नेतृत्व को सन् 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा एवं उपचुनाव में जनता नकार चुकी है। अब इटली की कोर्ट ने ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आरोपों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले में तो ईमानदार छवि वाले डॉ. मनमोहन सिंह एवं एंटोनी पर भी उंगली उठने लगी है। नरेन्द्र मोदी सरकार में मनोहर पर्रिकर जैसे साफ-सुथरी छवि वाले रक्षा मंत्री हैं। इसी प्रकार डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी के पास भी सोनिया-राहुल की पूरी जन्मपत्री है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के महावीर अपना और अपने नेतृत्व को आरोपों के घेरे से कैसे निकाल पाएंगे? यह सामने आना शेष है। कांग्रेस के नेताओं को मोदी सरकार के खिलाफ संसद में हंगामा करने और लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालना, केवल जनता में भ्रम पैदा करना है। यदि इटली कोर्ट ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, उसका बचाव तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। यदि कांग्रेस नेतृत्व यह समझता है कि हंगामा और संसद की कार्रवाई बाधित करने से उन पर लगे आरोपों के दाग धुल जाएंगे? यह सोच जनता को मूर्ख समझने जैसा है। भारत की जनता अब सत्ता प्राप्त करने के आड़े-टेढ़े हथकंडों को ठीक प्रकार से समझती है।
सोनिया और उनके शहजादे राहुल इस बात को बार-बार दोहराते है कि दो लोग ही मोदी सरकार को चला रहे हैं- एक है नरेन्द्र मोदीजी और दूसरे है रा.स्व.संघ के सरसंघचालक मोहनजी भागवत। संघ के बारे में कांग्रेस का नेतृत्व भी जानता है कि यह विश्व का सबसे व्यापक सामाजिक संगठन है। इसका संगठन शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक फैला हुआ हैं। करीब सवा लाख सेवा प्रकल्प स्वयंसेवक संचालित करते हैं। देशभक्त नागरिक निर्माण करने की संस्कार पद्धति संघ ने अपनाई है। इसी संस्कार पद्धति से अटलबिहारी वाजपेयी, आडवाणीजी, नरेन्द्र मोदीजी जैसा प्रभावी और राष्ट्र समर्पित नेतृत्व का निर्माण हुआ। इंदिराजी द्वारा थोपे गए आपातकाल का संघ के स्वयंसेवकों ने ही प्रखर विरोध किया। संघ और लोकतंत्र को समझने में कांग्रेस सत्ता सुख के माया जाल में चूक कर रही है। इटली की दृष्टि से न संघ को समझा जा सकता है और न लोकतंत्र को।

राजनैतिक पंडितों को यह समझना कठिन है कि कांग्रेस की वर्तमान नीति क्या है? राहुल गांधी को कांग्रेस में ऊर्जा पैदा करने की जिम्मेदारी दी गई है। वे हर रोज मोदी सरकार पर बिना आधार के आरोप लगाते हैं। राजनैतिक गंभीरता होने की बजाए छिछोरी और अनर्गल बातें कहते हैं। चाहे सोनियाजी की महत्वाकांक्षा यह हो कि उनका बेटा प्रधानमंत्री बनकर राज करे, लेकिन अभी तक के घटनाक्रम में जिस तरह सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को मुलायमसिंह यादव ने पानी फेर दिया। अब शहजादे की ताजपोशी के सपने देखते-देखते कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में न पड़ जाए। घटनाक्रम तो उसी ओर घूम रहा है।

लेखक-राष्ट्रवादी लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार

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