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ड्रोन कैमरे ने 10 फीट से कैद की किले की सुंदरता

ड्रोन कैमरे ने 10 फीट से कैद की किले की सुंदरता

लगभग दो माह में तैयार होगी डॉक्यूमैंट्री

ग्वालियर। किले पर स्थित सभी राष्ट्रीय धरोहरों की सुंदरता और इतिहास को सभी तक पहुंचाने की दृष्टि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विगत दिवस ड्रोन कैमरे से लगभग आठ घंटे तक सभी स्मारकों के फोटो कराएं। आपको बता दें कि पहले ये फोटोग्राफी एक से तीन मार्च तक होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणवश ये रद्द हो गई थी। आगरा से आए 5 सदस्यीय दल ने ड्रोन कैमरे से हजारों फोटो खींचे। एएसआई के अधिकारी बताते हैं कि लगभग दो माह में डॉक्यूमैंट्री बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद देशी-विदेशी पर्यटकों को ये उपलब्ध होगी। वहीं डॉक्यूमैंट्री बनाने में एक लाख रुपए का खर्च होगा।

पहले 1 अप्रैल से होनी थी फोटोग्राफी
किले पर स्थित राजा मानसिंह तोमर का किला, सहस्त्रबाहू मंदिर, म्यूजिम, तेली का मंदिर, उरवाई गेट, कर्णमहल समेत कई राष्ट्रीय स्मारकों की सुंदरता और इतिहास को चरित्र करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ड्रोन कैमरे से फोटोग्राफी करने की योजना एक से तीन अप्रैल तक बनाई थी। बाकायदा इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमित भी ली गई थी। लेकिन ऐन समय पर इन तिथियों में फोटोग्राफी नहीं हो सकी। इसके पीछे का कारण बताया जाता है कि आगरा की मैडम क्रियेटिव कंपनी को इसका कार्य दिया गया था। उसने आने में असमथर्ता व्यक्त की थी। इस वजह से 9 अप्रैल को फोटोग्राफी का कार्य किया गया।

तीन दिन का काम सिर्फ 8 घंटे में
आगरा की कंपनी से ड्रोन कैमरे द्वारा तीन दिन में राष्ट्रीय धरोहरों के फोटोग्राफी लेनी थी। वहीं कार्य सिर्फ आठ घंटे में पूरा कर लिया गया। अब ऐसा क्यों हुआ? ये बताने से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी कतरा रहे हैं। पांच लोगों ने ड्रोन कैमरे को सेट कर हवा में उछाल दिया। इसका कंट्रोल रिमोट के द्वारा किया जा रहा था।

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