Home > Archived > लक्ष्मी भी बृजवास के लिए तरसती हैं: सुश्री संध्या

लक्ष्मी भी बृजवास के लिए तरसती हैं: सुश्री संध्या

भिण्ड। ग्राम जामना में नरसी कक्का के ट्यूबवेल पर चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस कथा व्यास राष्ट्रीय धर्म प्रवक्ता पं. देवी संध्या जी ने कहा कि कृष्ण प्रेम का प्रत्यक्ष रूप गोपी हैं। कन्हैया गोपियों के समक्ष यमुना किनारे शरद पूर्णिमा की रात्रि में वंशी बजाते हंै और गोपियां दौड़ी हुई चली आती हैं। गोपियों को क्षण भर को मान हुआ तो गोविन्द अंतध्र्यान हो गए। तब गोपियों ने अपनी भावनाओं को कहा कि है गोविन्द आपके जन्म लेेने की बजह से ब्रज मण्डल स्वर्ग से भी ज्यादा प्रिय बन गया है। इन्दिरा अर्थात् लक्ष्मी भी बृजवास के लिए तरसती हैं। कथा के प्रारंभ में गणेश, नवग्रह, व्यासपीठ पोथी पूजन पारीक्षत सुभाष बाबू यादव एवं परिवारी जनों द्वारा किया गया। व्यास जी देवी संध्या जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कथा में आरती, प्रसाद वितरण संत महात्माओं, बाहर से आए हुए भक्तों के लिए भण्डारे की व्यवस्था की गई। 21 फरवरी को हवन यज्ञ व भण्डारे के साथ कथा का समापन होगा।

Share it
Top