Home > Archived > रोजाना 3 बजे बंद हो जाता है विद्यालय

रोजाना 3 बजे बंद हो जाता है विद्यालय

मामला बगवाज में संचालित प्राथमिक शाला का

श्योपुर। जिले में शिक्षा का स्तर आखिर क्यूं गिरता जा रहा है, इसका जवाब आपको तब मिल जायेगा जब आप धरातल पर इसका जायजा लेने निकलेंगे। यदि आपको जिले की शिक्षा व्यवस्था की हकीकत जाननी है या फिर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाखों करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद भी इसका ग्राफ बढते नहीं दिख रहा है तो इसका सीधा-साधा सा जवाब यह है कि जिले में ऐसे तमाम विद्यालय है जहां बच्चों को स्कूल खुलने के तीन घंटे बाद ही वहां से भगा दिया जाता है और स्वयं विद्यालय के कर्ताधर्ता भी वहां से नदारद हो जाते है साथ ही बच्चों को पढाने में यदि शिक्षकों को जोर आने लगेगा तो आखिर कैसे शिक्षा का स्तर ऊंचा उठेगा।
ऐसा ही एक मामला होने में तो कराहल विकासखण्ड का है लेकिन यह जिला मुख्यालय पर नाक के नीचे ही देखने को मिला है क्योंकि जिस विकासखण्ड में शा.प्रा.शाला संचालित हो रही है वह कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित बगवाज पंचायत में ही है। ग्राम बगवाज में संचालित इस विद्यालय में कहने को तो तीन शिक्षक है जो यहां के आदिवासी बाहुल्य बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराते है लेकिन इन शिक्षकों को न तो बच्चों को पढाने में कोई रूचि है और न ही शासन द्वारा निर्धारित समय तक यहां रूकने की। जब ग्रामीणों से इसकी जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय के प्रतिदिन 3 बजे बंद हो जाता है, साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि यहां हमारे बच्चे पढने के लिए आते है लेकिन जब वे यहां पढ़ते है तो उनकी आवाज को शिक्षकों द्वारा दबा दिया जाता है, वे कहते है कि तुम्हारे पढने से हमारा दिमाग खराब हो जाता है तुम सब चुपचाप बैठे रहो। तो सवाल यह उठता है कि यदि शिक्षकों को ही अध्यापन कराने में जोर आने लगेगा तो इन बच्चों का भविष्य अंधकार में जाने से आखिर कैसे बच पायेगा।
ये शिक्षक देते हैं शिक्षा?
ग्राम बगवाज में संचालित शा.प्रा.शाला के नोटिस बोर्ड पर जिन शिक्षकों के नाम दर्ज है उनमें कमल किशोर शर्मा संविदा शिक्षक वर्ग 2, शिव कुमार मांझी एवं श्रीमती शोभा सोनी के नाम शामिल है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर पदस्थ शिक्षक प्रतिदिन यहां से स्कूल टाईम से पहले ही चले जाते है, साथ ही बच्चों की शिक्षा भी वे नहीं दे पा रहे है ऐसे में बच्चों का शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है।

Share it
Top