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अपनी ही परिषद के खिलाफ उपाध्यक्ष ने खोला मोर्चा - लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

14 माह में नहीं हुआ कोई विकास कार्य,900 रुपए में खरीदा 175 कीमत का स्ट्रीट लाइट क्लेम्प

शिवपुरी। आज नगर पालिका परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा ने अपनी ही नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए। उन्होंने साफतौर पर कहा कि पिछले 14 माह के शासन काल में विकास का कोई भी काम नहीं हुआ, लेकिन विनाश और भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक ऐसे काम हुए हैं जिन्हें देखकर सिर शर्म से झुुक जाता है। नपा के जिम्मेदार पदाधिकारी ने इस संस्था को अपनी प्रायवेट लिमिटेड कंपनी बना लिया है। क्लैम्प की खरीद से लेकर बाजार बैठक वसूली में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। चहेतों को उपकृत किया गया है और नगर पालिका की फाइलें कार्यालय की जगह घरों की शोभाएं बढ़ा रही हैं। श्री शर्मा के आरोपों का जहां भाजपा पार्षदों ने खुलकर समर्थन किया वहीं एक भी कांग्रेस पार्षद अध्यक्ष के बचाव में सामने नहीं आया। अंतत: नपाध्यक्ष मुन्नालाल ने नाराजगी दिखाते हुए खड़े होकर कहा कि अभी एजेण्डे पर बात कीजिए, लेकिन उनकी बात को तबज्जो नहीं दी। मुख्य नगर पालिका अधिकारी रणवीर कुमार ने टिप्पणी की कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और वह पूरे मामलों को देखेंगे और जहां जांच की जरूरत होगी जांच भी कराएंगे।
नपा परिषद की बैठक आज सुबह 11 बजे शुरू हुई। उस समय तक अध्यक्ष सहित 13 महिला पार्षद और 15 पुरुष पार्षद बैठक में उपस्थित हो गए थे। उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा कुछ विलम्ब से बैठक में पहुंचे। उस समय एजेण्डे के बिन्दु क्रमांक 1 शहर में चल रही जलावर्धन योजना एवं सीवर लाइन से क्षतिग्रस्त हुए शहर के विकास के संबंध में चर्चा चल रही थी। आते ही उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन सहित 31 पार्षदों ने कल बहिष्कार क्यों किया? उन्होंने कहा कि वह प्रमाणित करना चाहते थे कि कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि परिषद सर्वोपरि है। आज के समाचार पत्रों में अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के उस बयान पर उपाध्यक्ष शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें श्री कुशवाह ने अन्नी शर्मा सहित उनके समर्थक कांग्रेस पार्षद एवं भाजपा पार्षदों को विकास विरोधी बताया था, क्योंकि वे परिषद की बैठक में नहीं पहुंचे थे। अध्यक्ष के इस आरोप का जवाब देते हुए अन्नी शर्मा ने कहा कि नपा के जिम्मेदार पदाधिकारी बताएं कि उन्होंने अपने 14 माह के कार्यकाल में विकास का कौन सा काम किया है जबकि भ्रष्टाचार और विनाश के अनेक काम हुए हैं।
उन्होंने कहा कि नगर पालिका के पूर्व सीएमओ कमलेश शर्मा को उन्होंने कहा था कि नपा एक मंदिर है और हम सब लोग उस मंदिर की गरिमा के रक्षक हैं। लेकिन आज स्थिति यह है कि नपा की अधिकांश फाइलें कार्यालय से गायब हैं जिनमें गड़बडिय़ां हुईं हैं उन फाइलों का पता ही नहीं है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ट्यूबलाइट में लगने वाला क्लैम्प बाजार में 175 रुपए में उपलब्ध है, लेकिन नगर पालिका में चार हजार क्लैम्पों की खरीद 900 रूपये प्रति क्लैम्प की दर से की गई है। इस पर भाजपा पार्षद भानु दुबे ने प्रतिक्रिया व्यक्त की कि नपा ने ट्यूबलाइट तो कुल 1200 की संख्या में खरीदी हैं फिर क्लैम्प चार हजार खरीदने का क्या अर्थ है। निर्दलीय पार्षद नीलम बघेल ने नपा द्वारा खरीदे गए क्लैम्प का भी प्रदर्शन किया।
नपा उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा ने बताया कि जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित क्लर्क सुषमा से क्लैम्प खरीदी की फाइल दिखाने को कहा, लेकिन तीन दिन तक वह फाइल नहीं दिखा सकीं और तीन दिन बाद उसने लिखित में दिया कि उक्त फाइल जिम्मेदारों से मांगने पर भी नहीं दी जा रही है। नपा के दूसरे भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अन्नी शर्मा ने परिषद की बैठक में कहा कि बाजार बैठक वसूली प्रतिमाह 16 से लेकर 22 हजार तक होती थी। इस पर मैंने आपत्ति व्यक्त की और पूर्व सीएमओ से कहा कि यह वसूली कम है इसलिए वसूली कर्ताओं के साथ प्रायवेट आदमियों को भेजा जाए। इसका परिणाम यह हुआ कि जनवरी 2016 माह में 1 लाख 5 हजार रुपए की वसूली हुई है। जल शुद्धिकरण में भ्रष्टाचार को स्पष्ट करते हुए अन्नी शर्मा ने कहा कि नपा नागरिकों को शुद्ध पानी मुहैया नहीं करा पा रही।
नपा द्वारा गंदे पेयजल की सप्लाई हो रही है इसकी शिकायत जब नागरिकों ने की तो मैंने फिल्टर प्लांट पर छापा मारकर उस ट्रक को जप्त किया जिसमें फिटकरी के स्थान पर चूने की सप्लाई की जा रही थी। उसकी जब मैंने सैम्पलिंग की और उसे परीक्षण के लिए भोपाल भेजा तो नगर पालिका के जिम्मेदार पदाधिकारी अपने छह सहयोगियों के साथ भोपाल गए और ओके रिपोर्ट बनवाकर ले आए। लेकिन मुझे खुशी है कि इस प्रयास से शिवपुरी के नागरिकों को अब शुद्ध पानी उपलब्ध हो रहा है। श्री शर्मा ने आरोप लगाया है कि 256 पम्प अटेण्डरों में से आधे भी काम नहीं कर रहे और इसकी आड़ में चहेतों को उपकृत किया जा रहा है। नपाध्यक्ष पर परिषद की अवहेलना का आरोप जड़ते हुए श्री शर्मा ने कहा कि 28 दिसम्बर को लालजीत आदिवासी पार्षद ने परिषद की बैठक बुलाने के लिए एक तिहाई पार्षदों का हस्ताक्षरित ज्ञापन दिया। इसके बाद पार्षद भानु दुबे ने 15 जनवरी को पुन: आवेदन दिया।
नियम के तहत अध्यक्ष को आवेदन देने के दो सप्ताह के भीतर बैठक बुलानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बैठक की तारीख 10 फरवरी तय की जो कि नियम के हिसाब से गलत थी। श्री शर्मा ने कहा कि मैंनेे पार्षदों के आवेदन के बाद परिषद की बैठक की तारीख 1 फरवरी तय की थी और इसके एजेण्डे में 48 बिन्दु थे, लेकिन अध्यक्ष ने 10 फरवरी बैठक की तारीख तय की और एजेण्डे में बिन्दु 48 से घटाकर 36 कर दिए। बिन्दु क्रमांक 36 में लिखा गया था कि इसमें अन्य प्रकरण अध्यक्ष की सहमति से लाए जाएंगे। श्री शर्मा ने सवाल उठाया कि इसका क्या अर्थ है? इसकी आड़ में विवादित मुद्दों को पास करने की तैयारी है। यदि ऐसा नहीं तो फिर परिषद से उन मुद्दों को छिपाने का क्या अर्थ है? इसके बाद बैठक में परिषद के एजेण्डे के अधिकांश बिन्दुओं को पारित कर दिया।

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