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खेत में प्रकट हुई हैं शीतला माता

खेत में प्रकट हुई हैं शीतला माता

लगभग 100 साला पुराना है सनातन धर्म के सामने स्थित मांदिर


शहर के अचलेश्वर मार्ग, सनातन धर्म मंदिर के सामने स्थित शीतला माता का मंदिर लगभग एक शताब्दी पुराने इस मंदिर में जहां नवरात्रियों में भक्तों का मेला सा लगता है वहीं अन्य दिनों में भी भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।



प्रशांत शर्मा/ग्वालियर।
शहर के बीचों बीच अचलेश्वर मार्ग पर सनातन धर्म मंदिर के सामने एक छोटा एवं अद्भुत मंदिर है। बताया जाता है कि आज जिस स्थान पर यह मंदिर है वहां कभी खेत हुआ करते थे। इस मंदिर में शीतला माता की जो प्रतिमा विराजित है, वह लगभग एक शताब्दी पूर्व खेत में खुदाई के दौरान प्रकट हुई थी। इस मंदिर पर दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों की हर मनोकामना को माता पूरा करती हैं।

मंदिर में स्थापित माता की मूर्ति से पहले यहां माता एक पिंडी के रूप में विराजित की गई थी, जिसके बारे में अधिकांश श्रद्धालुओं को जानकारी नहीं है। माता का यह पिंडी स्वरूप ही भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करने वाला है। यहां नवरात्र के नौ दिनों के अलावा अन्य दिनों में भी भक्त दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।

मंदिर के पुजारी देवीराम कुशवाह ने बताया कि यह मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के बारे में उनके नाना चुन्नीलाल ने उन्हें बताया था कि 100 वर्ष पहले यहां खेती हुआ करती थी। उसी समय यहां से माता की पिंडी निकली थी। जिसे चुन्नी लाल ने स्थापित किया। जो आज तक भक्तों की मनोकामना को पूर्ण कर रही है।


माता करती हैं सबकी मनोकामना पूर्ण
शीतला माता मंदिर के बारे में देवीराम कुशवाह का कहना है कि मंदिर का निर्माण उनके पूर्वजों ने कराया था और उनके बाद अब वह मंदिर की देखरेख का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में माता से जो भी भक्त सच्चे मन से मुराद मांगता है, उसकी सभी मुरादें पुरी होती है। जिनकी मनौती पूरी हो जाती है वे मंदिर में घंटा चढ़ाते हैं और भव्य पूजन व हवन करते हैं।

दर्शनों के लिए उमड़ती है भीड़
यहां नवरात्रों के अतिरिक्त भी भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में सुबह की आरती प्रात: 8 बजे व शाम की आरती 6.30 बजे की जाती है। भक्त सुबह व शाम महामाई की पूजा-अर्चना कर आर्शीवाद प्राप्त करते हैं।

नवरात्रों में होते हैं विशेष आयोजन
मंदिर में हर साल नवरात्रों के दिनों में विशेष आयोजन होते हैं और माता की सुबह-शाम भव्य आरती की जाती है। इसके साथ ही भंडारा भी लगाया जाता है और अष्टमी के दिन मां भगवती का जागरण भी किया जाता है। माता को मिश्री,दूध और बर्फी आदि का भोग लगाया जाता है।

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