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तानसेन के संगीत को विश्वभर में प्रचारित कर रहा है संस्कृति विभाग

तानसेन के संगीत को विश्वभर में प्रचारित कर रहा है संस्कृति विभाग

तानसेन समारोह में विभिन्न देशों के कलाकारों की शास्त्रीय प्रस्तुति से अभिभूत है कलाजगत


ग्वाालियर/मधुकर चतुर्वेदी। ।
भारत के अलग-अगल प्रदेशों में पायी जाने वाली जितनी भी कलाएं हैं, वह मध्य प्रदेश के अंचलों में अपने सतरंगी सौंदर्य की सुगंध चारो ओर बिखेर रही हैं। क्योंकि मप्र के निवासी हमेशा से कलाप्रिय रहे है और राष्ट्र्र की वेदी पर गायन, वादन, नृत्य, चित्रकला व साहित्य के माध्यम से जीवन में आनंद रस का प्रवाह कर रहे है। इतना ही नहीं मप्र की सरकार व यहां के संस्कृति विभाग ने एक कदम और बढ़ाते हुए विश्व संगीत की विभिन्न विधाओं से भारत के सामंजस्य की अनूठी पहल करके संस्कृति द्वारा एकता में अनेकता के सूत्र का प्रतिपादन किया है। यह कहना है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सितार वादिका स्मिता नागदेव का।

ग्वालियर में चल रहे तानसेन समारोह में इस बार मप्र संस्कृति विभाग द्वारा समारोह की थीम विश्व संगीत समागम पर आधारित की गई है और शासन की इस पहल को मूर्त रूप देने में स्मिता नागदेव ने योगदान दिया है। रविवार को स्वदेश से वार्ता में स्मिता ने बताया कि पिछले वर्ष से तानसेन संगीत समारोह में विदेशी कलाकारों की शास्त्रीय प्रस्तुति कराने का निश्चय हुआ थां और इस वर्ष भी शासन ने विश्व के विभिन्न देशों में वहां के शास्त्रीय संगीतज्ञों को बुलाने की सराहनीय पहल की। इस वर्ष तानसेन संगीत समारोह में पांच अलग-अलग देशों से विदेशी कलाकारों को ग्वाालियर में प्रस्तुति के लिए निमंत्रण दिया। स्मिता नागदेव ने बताया कि शासन की महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह का रूप देने की योजना की जानकारी उन्हें प्रमुख सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव से प्राप्त हुई। साथ ही संस्कृति संचालनालय के सहायक निदेशक राहुल रस्तोगी से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने बेल्जियम की मारग्रेट हर्मेंट, नार्वे की एनी हॉयत, इसराइल के जोहर इजाक फ्रेस्को, स्विट्जरलैंड के मेथिस बोएग्नर और इराक के ओसामा अब्दुलरसूल से संपर्क किया। स्मिता ने बताया कि वह स्वयं सितार वादन करने के लिए इन देशों में प्रवास पर रहती है और इन कलाकारों से संपर्क रहता है, इसलिए इन सभी कलाकारों की स्वीकृति मिल गई। इस समय यह सभी कलाकार ग्वालियर में प्रस्तुति देने के लिए उत्साहित होकर भारत के प्रवास पर हैं। स्मिता ने कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश की सरकार व संस्कृति विभाग के अधिकारियों पर गर्व है कि उन्होंने संगीत सम्राट तानसेन को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत के बाहर के कलाकारों को ग्वालियर आने का अवसर दिया। स्मिता ने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि, संस्कृति और कला गुणों से सराबोर है। यहाँ की परंपराओं ने लंबे समय तक कला, संगीत, साहित्य, वास्तुकला, दर्शन, चित्रों और ऐसे कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। भारत के बाहर से आए कलाकारों को भारतीय संगीत के नादयोग और भारतीय कलाकारों को इनके देशों की पारंपरिक धुनों को सुनने का अवसर मिला। स्मिता नागदेव का मानना है कि भारतीय रागों में विश्व की सभी संस्कृतियों को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता है, इससे विश्व में शांति की स्थापना में सहायता मिलेगी। साथ ही भारत की सर-सरिताओं के उद्गम और मिलन की मिथकथाओं से फूटती सहस्त्र धाराएँ विश्व जीवन को आप्लावित ही नहीं करेंगी बल्कि परितृप्त भी करती रहेंगी।

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