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कर्मयोगी बिल्डवेल के निदेशक ने फांसी लगाकर दी जान

कंपनी मालिक के उत्पीडऩ से उठाया आत्मघाती कदम

मथुरा। थाना हाइवे क्षेत्र स्थित मोतीकुंज में कर्मयोगी बिल्डवेल के निदेशक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिजनों ने कंपनी के मालिकों पर उत्पीडऩ का आरोप लगाया है। वहीं मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट मे भी सीधे तौर पर कंपनी के मालिकों को कठघरे मे खड़ा किया गया है। इस संबध मे प्रभारी एसएसपी अरूण कुमार सिंह ने बताया कि सुसाइड नोट का पुलिस परीक्षण कराकर कार्यवाही की जायेगी।

पुलिस के अनुसार डी-44 मोतीकुंज एक्सटेंशन निवासी 50 वर्षीय उमेश चन्द्र वर्मा पुत्र कल्याण सिंह पिछले करीब दो दशक से नीरव अग्रवाल और विश्वनाथ अग्रवाल की कर्मयोगी बिल्डवेल कंपनी मे बतौर इम्प्लॅायमेंट निदेशक के तौर पर कार्यरत थे। आज सुबह उन्होने अपने आवास के अंदर बने स्टोर रूम मे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना का पता उस समय लगा जब मृतक की पत्नी ऊषा वर्मा स्टोर की ओर गई, वहां का नजारा देखते ही उसके मुंह से चीख निकल गई। चीख पुकार सुनकर वहां पहुंचे पड़ोसियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
जानकारी होते ही थाना प्रभारी राजीव कुमार मौके पर पहुंच गए और मृतक के शव को कब्जे मे लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस द्वारा छानबीन करने पर वहां उन्हें मृतक द्वारा एक डायरी मे लिखा गया सुसाइड मिला। पुलिस ने उसे अपने कब्जे मे ले लिया। उधर पोस्टमार्टम गृह पर आए मृतक के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे विक्रम सिंह ने बताया कि कंपनी में मुख्य निदेशक के पद पर कार्यरत दिनेश अग्रवाल और कंपनी के मालिक सगे भाई नीरव अग्रवाल तथा विश्वनाथ अग्रवाल ने कपंनी मे किसानों के करोड़ों रूपए इन्वेस्टमेंट कराए थे। बताया कि कंपनी के मालिकों ने जब किसानों का रूपया वापस नहीं किया तो खसरा संख्या 95 के एक मामले मे उसके पिता को बलि का बकरा बनाकर पिछले साल अगस्त में जेल भिजवा दिया गया। जेल से उसके पिता विगत फरवरी में जमानत पर छूटे थे तथा उक्त मामले का फैसला अदालत दो दिन बाद देने वाली थी।

उनका कहना था कि कंपनी के निदेशक दिनेश अग्रवाल और मालिक नीरव अग्रवाल तथा विश्वनाथ अग्रवाल ने करोड़ों का घोटाला किया और उसके पिता को बेवजह अदालत से लेकर जेल तक घसीटा गया।

उनका यह भी कहना था कि कंपनी के मालिक उसके पिता को जबरन फरीदाबाद और दिल्ली आने की बोल रहे थे। जब उन्होने वहां जाने से मना कर दिया तो वह लोग उसके पिता को फंसाने की धमकी देने लगे तथा दूसरी ओर कंपनी मे करोड़ों रूपए लगाने वाले किसान रूपए वापस करने के लिए उसके पिता पर दबाव बना रहे थे। इससे मानसिक तनाव में आकर उन्होने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इधर थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि मृतक की डायरी के अंदर मिले सुसाइड नोट में उसने कंपनी के मालिकों को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। समाचार मिलने तक इस मामले की तहरीर पुलिस को नहीं दी गई थी।

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