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तानसेन उर्स के नाम से 1924 में शुरू हुआ संगीत समारोह

तानसेन उर्स के नाम से 1924 में शुरू हुआ संगीत समारोह


ग्वालियर।
रियासतकाल में फरवरी 1924 में ग्वालियर में उर्स तानसेन के रूप में शुरू हुए इस तानसेन संगीत समारोह का आगाज हरिकथा व मीलाद शरीफ के साथ ही हुआ था। तब से अब तक इसी परंपरा के साथ तानसेन समारोह का शुभारंभ होता आ रहा है।

इस समारोह की शुरूआत ग्वालियर के तत्कालीन महाराज माधव राव सिंधिया ने फरवरी 1924 में उर्स तानसेन के रूप में की थी। समारोह के प्रारंभिक वर्षों में इसमें मशहूर नृत्यांगनाएं भी भाग लेती थीं और नृत्य तथा गायन का क्रम अलग-अलग छोल दरियों में रात भर चला करता था । संगीत सम्राट तानसेन की याद को ताजा रखने तथा संगीत विधा की तरक्की और प्रोत्साहन के लिए तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया की पहल पर पहले उर्स तानसेन 7, 8 और 9 फरवरी 1924 को मनाया गया था। पहले यह समारोह सिर्फ तीन दिनों का होता था। लेकिन अब यह समारोह इसकी लोकप्रियता को देखते हुए पांच दिवसीय हो गया है। असगरी बेगम से लेकर मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां व सरोद वादक अमजद अली खां जैसे मूर्धन्य संगीत कलाकार इस समारोह में संगीत सम्राट तानसेन को स्वरांजलि देने आ चुके हैं।

1980 में राष्ट्रीय तानसेन सम्मान की स्थापना
संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा सन् 1980 में राष्ट्रीय तानसेन सम्मान की स्थापना की गई। वर्ष 1985 तक इस सम्मान की राशि पांच हजार रूपये थी। वर्ष 1986 में इसे बढ़ाकर पचास हजार रूपये कर दिया गया और वर्ष 1990 से इस सम्मान के अन्तर्गत एक लाख रूपये तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती रही। अब पुरस्कार राशि बढ़ाकर दो लाख रूपये कर दी गई है।

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