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टीआरपी बढ़ाने को राष्ट्रप्रेम से विमुख न हों पत्रकार: रविन्द्र किशोर सिन्हा

टीआरपी बढ़ाने को राष्ट्रप्रेम से विमुख न हों पत्रकार: रविन्द्र किशोर सिन्हा

कुशीनगर। प्रसिद्ध समाजसेवी और राज्यसभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा ने कहा कि टीआरपी बढ़ाने के लिये राष्ट्रप्रेम से पत्रकार विमुख न हों और सनसनीखेज खबर बनाने की प्रवृत्ति को दूर रखें।

बुद्ध इण्टर कालेज के सभागार में गुरूवार को 'पत्रकारिता का धर्म और राष्ट्रधर्म' विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिन्दुस्थान समाचार के अध्यक्ष, प्रसिद्ध समाजसेवी और राज्यसभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा ने कहा कि जब लोग पत्रकारिता की आलोचना करने लगे, तब उसमें सुधार जरुरी हो जाता है। टीआरपी बढ़ाने और सनसनीखेज खबर बनाने की प्रवृत्ति को दूर रखना होगा। पत्रकारिता का धर्म कभी-कभी शासन और सत्ता का सहयोग करना भी होता है। जहाँ दंगा, विद्रोह, देश का अहित होने की उम्मीद हो तो वहां सरकार का सहयोग जरुरी है। नकारात्मक घटनाओं को प्रकाशित करने से स्थितियां खराब हो सकती हैं। पत्रकारिता और राष्ट्र के धर्म को हम अलग-अलग करके नही आंक सकते हैं।

श्री सिन्हा ने इसे अच्छी तरह समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि एक व्यक्ति, परिवार के प्रति, एक परिवार, गांव के प्रति, एक गांव प्रदेश के प्रति और एक प्रदेश राष्ट्र के प्रति समर्पित होता है। यही कर्तव्य पत्रकारों का भी है। देश के प्रति समर्पण भाव से लेखन करना होता है।
उन्होंने पंडित नेहरू और पटेल का उदहारण देते हुए कहा कि जब दोनों में से एक को प्रधानमंत्री के रूप में चुनने का मौका मिला तो पटेल चुने गए थे। उन्हें इतना बड़ा समर्थन मिलने के पीछे कुछ और नहीं बल्कि राष्ट्र प्रेम था। उस समय लोगों में राष्ट्र और पत्रकारिता दोनों धर्मों के पालन का बोध था। अब शायद यह कम हो गया है। इसे फिर से जगाना होगा।
उन्होंने कहा कि कारगिल में सेना अपने पराक्रम से दुश्मनों के दाँत खट्टे करती है और सैनिक शहीद होते हैं। सैनिकों के लिए कफ़न खरीदने पर विपक्षी सवाल खड़े करते हैं और मीडिया टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में उस मुद्दे पर अनावश्यक बहस करती है। यह गलत है। यह स्वच्छ पत्रकारिता नहीं है।

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