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ललितपुर जिले में नहीं हो रहा टीबी के मरीज का इलाज

महंगाई के चलते उपचार कराए बिना घर लौटा मरीज

झांसी। शासन द्वारा टीबी के मरीजों का उपचार मुफ्त में किया जाता है, लेकिन अंचल के ललितपुर जिले में इसका ठीक उलटा ही हो रहा है। मरीज को सारी दवाएं बाजार से खरीदने को मजबूर किया जाता है। इसके चलते मरीज अपने परिवार सहित बिना उपचार कराए अपने घर वापस लौट गया है।
मरीज का परिवार मजदूरी कर किसी प्रकार परिवार का भरण पोषण करता है। घर की आर्थिक स्थिति भी सही नहीं है। उसके बेटे को टीवी हो गयी है। बेटे के इलाज में घर रखी पूंजी भी लग गयी है, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ है। मंहगा इलाज कराने के लिये अब उसकी हिम्मत नहीं है। जिस कारण वह बिना इलाज के ही अपने घर वापस लौट गया। यह कहानी जनपद ललितपुर के तालबेहट के थाना बार के ग्राम बसदगुवा के एक परिवार की है।
जनपद ललितपुर के तालबेहट के थाना बार अन्तर्गत ग्राम बसदगुवां निवासी राम प्रसाद की आर्थिक स्थिति दयनीय है। मजदूरी कर अपना और परिवार का भरण पोषण करता है। मजदूरी कर किसी प्रकार अपने 16 वर्षीय बेटे गजेन्द्र को को वह पढ़ा रहा था। इसी दौरान अचानक कुछ महीनों पूर्व उसके बेटे की हालत बिगड़ गयी। बिगड़ी हालत में उसे नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार के लिये ले गये जहां डॉक्टरों ने उसे टीवी बता दी। यह सुनते ही राम प्रसाद और उसकी पत्नी पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया।
राम प्रसाद ने रूद्र आवाज में बताया कि उन्होंने अपने बेटे का इलाजा कराना शुरू कर कर दिया। इलाज के लिये उसे झांसी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू कर दिया। मेडिकल कालेज के डॉक्टर प्रतिदिन 500 से 1000 रुपए की बाहर की दवाएं लिखते थे। इसके बाद भी किसी प्रकार बेटे का इलाज करा रहे था। इसके बाद भी उसके बेटे को कोई आराम नहीं लग रहा था। धीरे-धीरे उसकी हिम्मत ने जवाब दे दिया और उसने इस मंहगे इलाज कराने में अपनी असमर्थता जताई। वह अपने बेटे का बिना इलाज के ही अपने घर यह कहते हुये ले गया। उसके बेटे की कितने दिन की जिन्दगी वह नहीं जनता है, अब वह उसे अपने साथ घर में रखेगा और वही उसका इलाज करायेगा।

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