Home > Archived > क्रोध आने पर एक गिलास पानी पिएं: साध्वी वसुंधरा श्रीजी

क्रोध आने पर एक गिलास पानी पिएं: साध्वी वसुंधरा श्रीजी

क्रोध कम होने पर ही जागता है विवेक

शिवपुरी। आगरा में चातुर्मास कर शिवपुरी आईं साध्वी वसुंधरा श्रीजी म.सा. ने आज के प्रवचनों में कहा कि क्रोध तो सभी को आता है, लेकिन हमेें क्रोध न आये इसके लिए प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने इसके लिए कहा कि जब भी हमें क्रोध आये तब हम पांच मिनिट का मौन रखते हुए एक गिलास अवश्य पीयें। क्रोध कम होने के बाद ही विवेक जागता है। जब तक हम क्रोधित रहते हैं तब तक हमारा विवेक काम नहीं करता। जैन श्वेताम्बर मंदिर पर चल रहे प्रवचनों में काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य तीन स्वभावों से मिलकर बना है आकृति, कृति और प्रकृति। आकृति से तो हम एक बार में ही किसी के संपर्क में चले जाते हैं, परंतु कृति अर्थात् संपर्क बढऩे पर हमें व्यक्ति के स्वभाव का पता चलता है। इससे भी अधिक कार्य करती है प्रकृति इसके दौरान हम व्यक्ति के सतत् संपर्क में रहते हैं और उसके हावभाव से परिचित होते हैं। हम आकृति से तो मनुष्य बन गये हैं परंतु क्या वास्तव में कृति और प्रकृति से भी मनुष्य हैं उन्होंने कहा कि इस बात को एक कहानी के माध्यम से समझाया। जिसमें उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जब एक संत से पहली बार मिला और संत के चरण छूये तो संत ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि मनुष्य बनो। चूंकि पहली बार मिला था इसलिए वह संत के स्वभाव से परिचित नहीं था उसे संत की यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। उसने मन में सोचा कि संत ने आखिर मुझे ऐसा आशीर्वाद क्यों दिया? इस बात की जानकारी जब उसने अपने मित्र से चाही तो उन्होंने कहा कि कल जब तुम संत के चरण छूओ तो उन्हीं से पूछ लेना। अगले दिन वह व्यक्ति दुबारा संत के पास गया और उनके चरण छूये। संत ने फिर वही आशीर्वाद देते हुए कहा कि मनुष्य बनो। व्यक्ति ने क्रोधित होकर संत से कहा कि क्या मैं आपको मनुष्य नहीं दिखाई आपने मुझे ऐसा आशीर्वाद क्यों दिया? संत बोले, क्रोध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। साध्वी जी द्वारा प्रवचनों में कहा गया कि आज एसी में बैठकर भी गुस्सा हमारे दिमाग में भरा पड़ा है। प्रवचनों में साध्वी शुभंकराश्रीजी म.सा. एवं साध्वी धर्मोदयाश्रीजी म.सा. भी विराजमान थीं।

Share it
Top